Friday, June 14, 2019

☞   ✔️ 14/06/2019 जून : आज का इतिहास

14 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ👉

1634 – रूस और पोलैंड के बीच पोलियानोव शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
1658 – ड्यून्स की लडाई में ब्रिटिश और फ्रांसीसी सेनाओं ने स्पेन को हराया।
1775 – अमेरिकी सेना की स्थापना हुई।
1777 – अमेरिकी कांग्रेस ने बैठक के दौरान अपना झंडा चुना।
1872 - ट्रेड यूनियनों कनाडा में वैध किया गया।
1900 – हवाई क्षेत्र अमरीकी राष्ट्र का हिस्सा बना।
1901 – पहली बार गोल्फ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
1907 – नॉर्वे में महिलाओं को मतदान करने का अधिकार मिला।
1916 - सर परशुरामभाऊ कॉलेज भारत के पुणे में, नई पूना कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया।
1917 – इंग्लैंड पर जर्मनी का पहला हवाई हमला, पूर्वी लंदन में सौ से ज्यादा लोगों की मौत।
1934 – आस्ट्रिया की राजधानी वियना में हिटलर और बेनिटो मुसोलिनी की मुलाकात।
1940 – द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की सेना ने फ्रांस की राजधानी पेरिस पर कब्जा किया।
1945 - एक विजय परेड रंगून में आयोजित किया गया।
1947 – कांग्रेस कार्य समिति ने भारत विभाजन के लिए माउंटबेटन योजना की प्रस्ताव स्वीकृति को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के समक्ष रखा।
1949 – वियतनाम राष्ट्र का गठन।
1958 – डॉ सी.वी. रमन को क्रेमलिन में लेनिन शांति पुरस्कार प्रदान किया गया।
1962 – फ्रांस की राजधानी पेरिस में यूरोपीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना की गई जिसका नाम बाद में बदल कर यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी कर दिया गया ।
1999 - थाबो मबेकी दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति निर्वाचित।
2001 - जांच आयोग ने दीपेन्द्र को ही शाही परिवार का हत्यारा बताया।
2004 - पंचशील सिद्धान्त की 50वीं वर्षगांठ पर बीजिंग में अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार।
2005 - माइकल जैक्सन बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़े दस मामलों में बरी।
2007 - चीन के गोवी रेगिस्तान में पक्षीनुमा विशाल डायनसोर के जीवाश्म मिले।
2008 - केन्द्र सरकार अलग गोरखालैंण्ड राज्य के निर्माण की सम्भावना को ख़ारिज किया।
2008 - राजस्थान के बाँसवाड़ा ज़िले में 96 मीट्रिक टन की सोने की ख़ान का पता चला।
2008 - चीन के उत्तरी प्रान्त शांग्झी में एक कोयला खादान में विस्फोट में 27 लोग घायल हुए।
2008 - नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र ने नारायणहिती महल ख़ाली किया।
2009 - 55 वें LPGA चैम्पियनशिप एना नोर्डकविस्ट ने जीता।
2012 – विशाखापत्तनम में भारतीय इस्पात संयंत्र में विस्फोट से 11 लोगों की मौत हो गई और 16 घायल हो गये।


*14 जून को जन्मे व्यक्ति👉*


1595 - गुरु हरगोविंद सिंह - सिक्खों के छठे गुरु।
1880 – वैज्ञानिक सतीश चंद्र दासगुप्ता का जन्म (कन्फर्म नहीं)।
1920 - भारत भूषण - भारतीय अभिनेता।
1922 - के. आसिफ़ - प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक।
1928 – क्रांतिकारी चे ग्वेरा का जन्म हुआ। इन्होंने क्यूबा की मुक्ति में अपनी अह्म भूमिका निभाई (कन्फर्म नहीं)।
1946 - डॉनल्ड ट्रम्प - संयुक्त राज्य अमेरिका के 45 वें और वर्तमान राष्ट्रपति हैं ।
1955 - किरण खेर - भारतीय अभिनेत्री , वर्तमान में यह चण्डीगढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं।
1969 – 22 ग्रैंड स्लैम जीतन वाली टेनिस स्टार स्टेफी ग्राफ का जन्म।
1977 – दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज बोएटा डिपेनार का जन्म हुआ। 
1979 - तरुण अरोड़ा भारतीय अभिनेता।


*14 जून को हुए निधन👉*


1920 - मैक्स वेबर - प्रसिद्ध जर्मन दार्शनिक एवं इतिहासकार।
1961 - कार्यमाणिवकम श्रीनिवास कृष्णन - प्रसिद्ध भारतीय भौतिक वैज्ञानिक।
2007 - कुर्त वॉल्डहाइम - संयुक्त राष्ट्र संघ के चौथे महासचिव थे।
2011 - असद अली ख़ाँ - रुद्रवीणा वादक।


*14 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉*


🔅 श्री सुपार्श्वनाथ जयन्ती ।
🔅 मेला खाटूश्यामजी (राज.) ।
🔅 गुरु श्रीहरगोबिंद सिंह जयन्ती (तारीखानुसार) ।
🔅 विश्व रक्तदान दिवस ।


विश्व रक्तदाता दिवस 2019: आज करें रक्तदान

भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के बावजूद रक्तदान में काफी पीछे है. रक्त की कमी को खत्म करने के लिए विश्व भर में रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है.

14 जून: विश्व रक्तदाता दिवस

पूरी दुनिया में 14 जून 2018 को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है. इस दिवस का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है.
भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के बावजूद रक्तदान में काफी पीछे है. रक्त की कमी को खत्म करने के लिए विश्व भर में रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य रक्तदान को प्रोत्साहित करना और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है.

हर तीसरे महीने रक्तदान करें:

रक्तदान करने से शरीर में कोई कमी नहीं आती और कोई भी स्वस्थ व्यक्ति हर तीसरे महीने रक्तदान कर सकता है.

भारत में रक्तदान की स्थिति:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है. अर्थात क़रीब 25 लाख यूनिट रक्त के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज़ दम तोड़ देते हैं.

उद्देश्य और थीम:

इस दिन रक्त जागरूकता अभियान चलाया जाता है और लोगों को मुफ्त रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जाता है. विश्‍व रक्‍तदाता दिवस 2019 की थीम ‘Safe Blood for All’ है, यानी सभी के लिए सुरक्षित रक्‍त की व्‍यवस्‍था करना है. इस थीम के द्वारा उन लोगों को प्रोत्‍साहित किया जाना है, जो अभी तक इस अभियान से नहीं जुड पाए हैं.

विश्व रक्तदान दिवस के बारे में:

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1997 से हरेक साल 14 जून को 'विश्व रक्तदान दिवस' मनाया जाता है. साल 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली थी. इसका उद्देश्य यह था कि रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं पड़े.

अबतक विश्व के करीब 49 देशों ने ही इस पर अमल किया है. इसके तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा दें.

14 जून ही रक्तदान दिवस क्यों?

विश्व रक्तदान दिवस, शरीर विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त कर चुके वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद में पूरी विश्व में मनाया जाता है. महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्‍म 14 जून 1868 को हुआ था. उन्होंने मानव रक्‍त में उपस्थित एग्‍ल्‍युटिनि‍न की मौजूदगी के आधार पर रक्‍तकणों का ए, बी और ओ समूह की पहचान की थी. रक्त के इस वर्गीकरण ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया. इसी खोज के लिए महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन को साल 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था. उनकी इसी खोज से आज करोड़ों से ज्यादा रक्तदान रोजाना होते हैं और लाखों की जिंदगियां बचाई जाती हैं.

विश्व रक्तदाता दिवस क्यों मनाया जाता है?

पुरे विश्व भर में कहीं भी जरुरतमंद व्यक्ति के लिये रक्त की जरुरत को पूरा करने हेतु विश्व रक्त दाता दिवस मनाया जाता है. ये अभियान प्रत्येक साल लाखों लोगों की जान बचाता है और रक्त प्राप्त करने वाले व्यक्ति के चेहरे पर एक प्राकृतिक मुस्कुराहट देता है.

रक्तदान को लेकर ग़लतफहमी:


रक्त दान से कितने व्यक्तियों के जीवन को भी बचाया जा सकता है. विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अभी भी बहुत से लोग यह समझते हैं कि रक्तदान से शरीर कमज़ोर हो जाता है. इतना ही नहीं यह ग़लतफहमी भी व्याप्त है कि नियमित रक्त देने से लोगों की रोगप्रतिकारक क्षमता कम होती है और उसे बीमारियां जल्दी जकड़ लेती हैं. यहाँ भ्रम इस तरह से फैला हुआ है कि लोग रक्तदान का नाम सुनकर ही कॉप उठते हैं.




🌻आपका दिन *_मंगलमय_* हो जी ।🌻

Advertisement Adnow

Popular Posts of The month

Amazon Offers

 
अब पाये सभी सरकारी नौकरी और उनसे जुड़े हुए किसी भी सवालो के जवाब हमारी website पर सबसे पहले