प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व का सबसे ताकतवर व्यक्ति चुना गया
ब्रिटिश हेराल्ड द्वारा जारी सूची में विश्वभर की 25 से अधिक शख्सियतों को शामिल किया गया था और जज करने वाले पैनल एक्सपर्ट्स ने सबसे ताकतवर शख्स के चयन के लिए चार उम्मीदवारों का नाम सामने रखा.
✅ फ्राँस के राफेल नडाल ने ऑस्ट्रिया के डॉमिनिक थिएम को हराकर रिकॉर्ड 12वीं बार फ्रेंच ओपन टेनिस का पुरुष एकल खिताब जीत लिया।
✔️ नडाल ने फ्रेंच ओपन में अब तक सिर्फ दो मैच हारे हैं और 93 मैचों में जीत हासिल की है।
👉 नडाल 12 बार इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुँचे और हर बार उन्होंने खिताब जीता।
👉 उन्होंने 2005 से 2008, 2010 से 2014 और 2017 से 2019 तक फ्रेंच ओपन का पुरुष एकल खिताब जीता है।
✔️इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की एश्ले बार्टी ने अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। इस ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के महिला एकल के फाइनल में उन्होंने चेक गणराज्य की माकेर्ता वोनद्रोउसोवा को पराजित किया।
अमरीश पूरी की 87वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर किया याद
बॉलीवुड अभिनेता अमरीश पुरी की आज 87वीं जयंती है. गूगल ने डूडल बनाकर अमरीश पुरी को उनके 87वें जयंती पर याद किया है. अमरीश पुरी भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में से एक थे.
बहुत सारे लोग अमरीश पुरी को उनके किरदार मोगैंबो के लिए जानते हैं. हालांकि गूगल ने फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में उनके लुक पर स्केच बनाया है. अमरीश पुरी ने फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में काजोल के पिता चौधरी बलदेव सिंह का भूमिका निभाया था. इस फिल्म का मुख्य डायलॉग 'जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी' काफी विख्यात है.
अमरीश पुरी मोगैंबो के किरदार से फेमस हुए
अमरीश पुरी 'मि. इंडिया' के मोगैंबो के किरदार से ऐसे फेमस हुए कि ये किरदार अनोखा बन गया. अमरीश पुरी ने न सिर्फ फिल्मों में विलेन का रोल निभाया बल्कि जब वे कैरेक्टर रोल में आए तो उन्होंने अपने फैन्स की आंखें नम कर दीं. 'दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे' में अमरीश पुरा का डायलॉग 'जा सिमरन जा' तो ऐसा आइकॉनिक डायलॉग बना है कि आज भी सबकी जुबान पर रहता है.
अमरीश पुरी ने लगभग 400 फिल्मों में काम किया
अमरीश पुरी ने लगभग 400 फिल्मों में काम किया था. उन्होंने हिंदी फिल्मों के अतिरिक्त मराठी, पंजाबी, मलयालम समेत कई अन्य भाषाओं की फिल्मों में काम किया. उन्हें साल 1979 में संगीत नाटक एकेडमी के पुरस्कार से भी नवाजा गया था. अमरीश पुरी के अभिनय से सजी कुछ मशहूर फिल्मों में 'निशांत', 'गांधी', 'कुली', 'नगीना', 'राम लखन', 'त्रिदेव', 'फूल और कांटे', 'विश्वात्मा', 'दामिनी', 'करण अर्जुन', 'कोयला' आदि शामिल हैं.
अमरीश पुरी का निधन
अमरीश पुरी का निधन 12 जनवरी 2005 को मुंबई में हुआ था. वे उस समय 72 साल के थे. उनका निधन ब्रेन ट्यूमर की वजह से हुआ था. उनके अचानक हुये इस निधन से बॉलवुड जगत के साथ-साथ पूरा देश शोक में डूब गया था.
अमरीश पुरी के जीवन की 10 बड़ी बातें
• अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को पंजाब के नवांशहर में हुआ था. अमरीश पुरी चार भाई बहन थे और बड़े भाई मदन पुरी और चमन पुरी दोनों फिल्म एक्टर थे.
• अमरीश पुरी ने अपने करियर की शुरूआत श्रम मंत्रालय के नौकरी से की थी.
• अमरीश पुरी ने उर्मिला दिवेकर से शादी की थी. उनके दो बच्चे हैं.
• उन्होंने फिल्मों में काम पाने की तलाश में अपना पहला ऑडिशन साल 1954 में दिया था. हालांकि उन्हें इसमें रिजेक्ट कर दिया गया था.
• अमरीश पुरी को फिल्म में पहला ब्रेक साल 1971 में फिल्म रेशमा और शेरा में मिला था. इसके बाद अमरीश पुरी ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा था. उन्होंने फिल्मी सफर में एक से बढ़कर एक किरदार उनके साथ जुड़ते चले गए.
• अमरीश पुरी ने नौकरी के साथ ही पृथ्वी थिएटर में नाटक करने शुरू कर दिए थे. वे रंगमंच की दुनिया का दिग्गज नाम बन गए थे.
• उन्होंने साल 1982 में सुभाष घई की 'विधाता' में विलेन का रोल निभाया था और यह काफी पॉपुलर भी हुआ था.
• अमरीश पुरी को भारतीय सिनेमा का सबसे यादगार विलेन माना जाता है. अमरीश पुरी की ऐक्टिंग से हॉलिवुड भी काफी प्रभावित था.
• अमरीश पुरी बॉलीवुड के एक ऐसे विलेन थे जो फिल्मों में हीरो पर भारी पड़ जाते थे.
• अभिनेता के रूप निशांत, मंथन और भूमिका जैसी फ़िल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले अमरीश पुरी ने बाद में खलनायक के रूप में काफी प्रसिद्धी पायी.
जापान को हराकर भारतीय महिला हॉकी टीम ने जीता FIH सीरीज फाइनल्स का खिताब
इसके बाद गुरजीत ने 45वें और 60वें मिनट में गोल कर टीम की जीत सुनिश्वित की। दुनिया की नौंवे नंबर की भारतीय टीम इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचकर पहले ही 2020 ओलंपिक क्वालीफायर के अंतिम दौर के लिए क्वालीफाई कर चुकी थी। रानी टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुनी गई जबकि गुरजीत शीर्ष स्कोरर रहीं। भारतीय कप्तान ने जापानी गोलकीपर अकियो टनाका को दायीं ओर से पछाड़कर गोल दागकर टीम को आगे कर दिया।
भारत ने दबदबा बरकरार रखते हुए नौंवे मिनट मे दूसरा पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया लेकिन फाउल कर बैठी। जापान की टीम मौके नहीं बना पा रही थी और उसने पहले 15 मिनट में केवल दो बार ही भारतीय सर्कल में प्रवेश किया। पर दूसरी बार जब टीम सर्कल के अंदर पहुंची तो जापानी फॉरवर्ड पंक्ति ने मिलकर गोल में पहले शाट पर ही बराबरी गोल दाग दिया। कानोन मोरी के डिफ्लेक्शन शॉट का भारतीय गोलकीपर सविता बचाव नहीं कर सकी।
दूसरे क्वार्टर में वंदना कटारिया ने 18वें मिनट में गोल करने का शानदार मौका गंवा दिया जिनका शाट गोल से बाहर चला गया। जापान ने लय में आना शुरू कर दिया और उसने कई मौके भी बनाए, पर भारतीय रक्षापंक्ति ने सुनिश्चित किया कि विपक्षी टीम का कोई प्रयास सफल नहीं हो। दोनों टीमें बढ़त बनाने की होड़ में लगी रहीं, इसी दौरान जापान ने दो बार सर्कल में प्रवेश किया और दो शॉट लगाए जबकि भारत ने आठ बार सर्कल में सेंध लगाई और पांच शॉट लगाए।
भारत को तीसरे क्वार्टर में एक और पेनल्टी कार्नर मिला। ड्रैग फ्लिकर गुरजीत फिर तारणहार निकली, उन्होंने जापानी गोल के बाईं ओर से शाट लगाया और टीम को 2-1 से बढ़त दिला दी। चौथे क्वार्टर में भी गोल करने के लिए मशक्कत जारी रही और अंतिम मिनट में गुरजीत ने पेनल्टी कॉर्नर पर मैच में दूसरा गोल दागकर स्कोर 3-1 कर दिया और भारतीय टीम को जीत दिलाई।







