Thursday, June 27, 2019

☞   ✔️ 27/06/2019 मशहूर अभिनेत्री एवं निर्देशक विजया निर्मला का निधन, गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है नाम

मशहूर अभिनेत्री एवं निर्देशक विजया निर्मला का निधन, गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है नाम

दक्षिण भारतीय फिल्मों की जानीमानी अभिनेत्री एवं निर्देशक विजया निर्मला का दिल का दौरा पड़ने से 26 जून 2019 को निधन हो गया. उनके परिवार में पति कृष्णा और बेटा नरेश हैं.

उन्होंने करीब 44 तेलुगु फिल्मों का निर्देशन किया है और ऐसा करने वाली पहली महिला फिल्म निर्देशक होने के वजह से साल 2002 में उनका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया.

विजया निर्मला के बारे में:

•   विजया निर्मला का जन्म 20 जनवरी 1946 को तमिलनाडु में हुआ था. तेलेगु सिनेमा में उनका योगदान बहुत बड़ा रहा है.

•   उन्हें साल 2008 में तेलुगु सिनेमा के पुरस्कार रघुपीठ वेंकैया अवॉर्ड से नवाजा गया था. विजया निर्मला ने मात्र सात साल की उम्र में बतौर बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था.

•   विजया निर्मला ने इंगा वीत्तू पेने, पनामा पासामा, ए ऐनम जैसी कई फिल्मों में काम किया. साक्षी फिल्म के सेट पर उनकी मुलाकात एक्टर कृष्णा से जिनसे उन्होंने दूसरी शादी रचाई. दोनों ने लगभग 47 फिल्मों में काम किया.

•   विजया निर्मला एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री, निर्माता और निर्देशक है, जो मुख्यतः तेलुगू सिनेमा में काम करतीं थी.

•   विजया निर्मला ने मलयालम, तेलुगु और तमिल भाषा की करीब 200 फिल्मों काम किया. उन्होंने छोटे पर्दे पर भी काम किया था.

•   विजया निर्मला को फिल्मी दुनिया की सूझबूझ विरासत में मिली थी, क्योंकि उनके पिता एक फिल्म प्रोडक्शन में काम करते थे.

•   उन्होंने 11 साल की उम्र में तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था. उन्होंने इसके बाद कई फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी से लोगों का दिल जीता था. तेलुगु के अलावा उन्होंने कई तमिल फिल्मों में भी काम किया.

•   उन्होंने 3 लाख के बजट पर एक मलयालम फिल्म के साथ निर्देशक की शुरुआत की थी.

नीरव मोदी के बैंक खाते स्विट्जरलैंड में सीज, करीब 60 लाख डॉलर की संपत्ति जब्त

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के आरोपी नीरव मोदी पर सरकार ने शिकंजा कसा है. नीरव मोदी और बहन पूर्वी मोदी के चार बैंक खाते स्विट्जरलैंड में फ्रीज कर दिए गए हैं. साथ ही जायदाद भी सीज की गई है. माना जा रहा है कि नीरव मोदी को करीब 60 लाख डॉलर की संपत्ति जब्त हो गई है.

पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी को लंदन में गिरफ्तार किया गया था. ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने 18 मार्च को ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुरोध पर नीरव मोदी के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया था. नीरव मोदी पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक को धोखा देकर 13,600 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था. केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पीएनबी घोटाले के संबंध में नीरव मोदी, मेहुल चोकसी तथा अन्य के खिलाफ जांच कर रही है.

ब्रिटेन की एक जेल में बंद:

गौरतलब है कि देश छोड़ कर भागने वाला हीरा कारोबारी नीरव मोदी फिलहाल ब्रिटेन की एक जेल में बंद है और भारत लगातार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश करता रहा है. नीरव मोदी की सुनवाई लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही है.

पीएनबी द्वारा किया गया था खुलासा:

पीएनबी द्वारा किये गये खुलासे में देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले के बारे में जानकारी सामने आई है. मीडिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार यह घोटाला करीब 11500 करोड़ रुपये का है. पीएनबी ने शेयर बाज़ार को मुंबई स्थित शाखा में घोटाले की जनाकारी दी थी. पीएनबी ने यह घोटाला सामने आने के बाद अपने 10 अधिकारियों को निलंबित कर दिया था.

नीरव मोदी के बारे में:

नीरव मोदी डायमंड कैपिटल के रूप में प्रसिद्ध बेल्जियम के एंटवर्प शहर की विख्यात डायमंड ब्रोकर कंपनी के परिवार से संबंधित हैं. नीरव मोदी के विश्व भर के अहम शहरों में ज्वेलरी शोरूम हैं. इनमें दिल्ली मुंबई, न्यूयॉर्क, हॉगकॉग, लंदन, मकाउ आदि शामिल हैं. उनके सबसे चर्चित डिजायन एंडलेस कट, जैस्मीन कट, ऐनरा कट और मुगल कट विशेष लोकप्रिय हैं.

नीरव मोदी का नाम फोर्ब्स की सबसे अमीर लोगों की सूची में भी आ चुका है. वर्ष 2017 की सूची में वे 57वें नंबर पर थे. उनकी कुल संपत्ति 1.73 अरब डॉलर यानि 110 अरब रुपये है, जबकि उनकी कंपनी का राजस्व 149 अरब रुपये बताई जाती है.

कैसे हुआ घोटाला?

पीएनबी ने सीबीआई के पास एलओयू से सम्बंधित 280.7 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की एफआईआर कराई थी. उस समय पीएनबी के अधिकारियों ने कहा था कि वे अभी इस घोटाले के स्तर की जांच कर रहे हैं. पीएनबी ने अपनी शिकायत में कहा कि डायमंड्स आर अस, सोलर एक्सपोर्ट्स एवं स्टेलर डायमंड्स नामक तीन हीरा कम्पनियां 16 जनवरी को उनके पास आईं और उनसे क्रेडिट के लिए अनुरोध किया.

पीएनबी ने खरीदार ऋण को बढ़ाने के लिए ऋणदाताओं को पैसा जारी करने हेतु 100 प्रतिशत नकदी मार्जिन की मांग की थी. नीरव मोदी उनके भाई निशाल, पत्नी एमी और मेहुल चीनूभाई चौकसी इन कम्पनियों में भागीदार हैं. इनके न्यूयॉर्क, हॉगकॉग तथा लंदन में हीरे के आभूषणों के शोरूम हैं.

जी-20 शिखर सम्मेलन: जापान पहुंचे पीएम मोदी, इन मुद्दों पर करेगें चर्चा

जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 जून 2019 को जापान के ओसाका पहुंच गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी जी 20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 26 जून 2019 की रात रवाना हुए.

पीएम मोदी जी 20 सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से लेकर आतंकवाद और प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा कर सकते हैं. वह इस सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेने के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के प्रमुख नेताओं से भी मिलेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह छठा जी-20 शिखर सम्मेलन है. जापान के ओसाका शहर में 28-29 जून को इस शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी अगले तीन दिनों तक, वैश्विक मंच पर भारत के नजरिए को रखने के लिये कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय चर्चाओं का हिस्सा होंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण, डिजिटलाइजेशन और जलवायु परिवर्तन जैसी प्रमुख वैश्विक चुनौतियों का समाधान हमारी इस बैठक का मुख्य मुद्दा होगा.

प्रधानमंत्री शिंजो आबे से भी मुलाकात

पीएम मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से भी मुलाकात करेंगे. इसमें आपसी कारोबार समेत तमाम मुद्दों पर बात होने की संभावना है. अपनी सरकार की दूसरी पारी में पीएम मोदी का ये पहला बड़ा कूटनीतिक दौरा है. प्रधानमंत्री अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी मुलाकात करेंगे. इसके अतिरिक्त ब्रिक्स देशों के राष्ट्र प्रमुखों की बैठक भी होनी तय है.


जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान

जापान के ओसाका में होने जा रहे जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी जिन देशों के साथ दस द्विपक्षीय वार्ता करेंगे वो फ्रांस, जापान, इंडोनेशिया, अमेरिका और तुर्की हैं. इसके साथ ही, ब्रिक्स यानि ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका और रिक अर्थात रूस-चीन-भारत के नेताओं के बीच बैठक होगी.


क्यों खास है जी-20

वैश्विक मंच होने की वजह से यहां पर उठने वाले सभी मुद्दे महत्वपूर्ण अहमियत रखते हैं. यह मंच अमेरिका के लिए इसलिए बेहद खास है क्‍योंकि यहां से उठी आवाज सभी देशों के लिए होती है. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप यहां पर जो कुछ भी कहेंगे वह दूसरे देशों के लिए स्‍पष्‍ट इशारा होगा.

जी-20 शिखर सम्मेलन क्या है और शामिल देश?

जी-20 सदस्यों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपियन यूनियन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, साउथ अफ्रीका, साउथ कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल है. जी-20 में विश्व का 80 प्रतिशत व्यापार, दो-तिहाई जनसंख्या और दुनिया का करीब आधा हिस्सा शामिल है.

असम NRC की अतिरिक्त मसौदा सूची प्रकाशित, करीब 1 लाख लोगों का नाम शामिल, ऐसे करें नाम चेक

असम में नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) का मसौदा तैयार करने की अतिरिक्त सूची 26 जून 2019 को सभी के लिए प्रकाशित की गई है. इस सूची में 1,02,462 लोगों के नाम शामिल हैं, जिन्हें अब अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दावे दाखिल करने हैं. इसमें उन लोगों के नाम शामिल हैं जिनके नाम जुलाई 2018 में प्रकाशिक मसौदे में शामिल थे लेकिन बाद में ये लोग अयोग्य पाए गए थे.

इस सूची में 30 जुलाई 2018 को प्रकाशित मसौदे में शामिल वे नाम होंगे, जो बाद में इसमें शामिल किये जाने के लिए अयोग्य पाये गये थे. इस सूची में उन लोगों को भी शामिल किया गया है, जो दावे और आपत्तियों के निपटान के लिए आयोजित सुनवाई के दौरान अयोग्य पाये गये थे. इस लिस्ट को एनआरसी असम की आधिकारिक वेबसाइट www.nrcassam.nic.in पर जाकर चेक किया जा सकता है.

हालांकि जिन लोगों को इस सूची से बाहर रखा गया है, उन्हें व्यक्तिगत रूप से उनके आवासीय पते पर दिये जाने वाले पत्र (एलओआई) के माध्यम से सूचित किया जायेगा तथा ऐसे व्यक्तियों को 11 जुलाई को नामित एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके) पर अपने दावे दर्ज करने का अवसर मिलेगा.

एनआरसी के राज्य समन्वयक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह सूची नागरिकता की अनुसूची (नागरिक पंजीकरण एवं राष्ट्रीय पहचान पत्र) नियम 2003 के क्‍लाज-5 के प्रावधानों के मुताबिक प्रकाशित की गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2019 में असम में एनआरसी (NRC) को अंतिम रूप देने की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने निर्देश दिया कि एनआरसी से संबंधित प्रक्रिया 31 जुलाई तक या इससे पहले पूरा कर ली जानी चाहिए. यदि आपत्ति करनेवाला हाजिर नहीं होता है तो एनआरसी कोआर्डिनेटर (संयोजक) निर्धारित कानून का पालन करते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाए. अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में एक दिन की भी देरी नहीं की जा सकती है.

मुख्य बिंदु:

•    विज्ञप्ति में बताया गया है कि 31 जुलाई को नागरिक पंजी के अंतिम प्रकाशन से पहले उनके दावों का निपटान किया जायेगा.

•   निवारण सूची को नामित एनआरसी सेवा केंद्र में उपायुक्त/एसडीओ (सिविल/सर्किल अधिकारी) के कार्यालय में प्रकाशित किया जायेगा, जहां गांव/वार्ड के लिए अतिरिक्त सूची समेकित तरीके से उपलब्ध होगी. यह ऑनलाइन भी उपलब्ध होगा.

•   जिन व्यक्तियों की मसौदा स्थिति अतिरिक्त सूची में निष्कासन में बदल जायेगी. उन्हें ‘अतिरिक्त सूची से बाहर रखने' के रूप में रेखांकित किया जायेगा.

•   30 जुलाई 2018 को प्रकाशित मसौदा एनआरसी में पहले से ही शामिल किये गये और अतिरिक्त सूची से प्रभावित नहीं होने वाले व्यक्तियों को पहले की तरह प्रदर्शित किया जायेगा.

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) क्या है?

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) असम के नागरिकों की नागरिकता सूची है. इसमें उन सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटोग्राफ हैं. यह नागरिक  25 मार्च 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में यह आश्वासन भी दिया गया है कि जो लोग वैध नागरिक नहीं पाए गए हैं, उन्हें निर्वासित नहीं किया जाएगा.

असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की आवश्यकता क्यों पड़ी?

असम में बहुत लंबे समय से अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों का मुद्दा छाया रहा है. इसे लेकर छात्रों ने 80 के दशक में आंदोलन किया था. इसके बाद असम गण परिषद और तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के बीच समझौता हुआ था. इसमें कहा गया है कि साल 1971 तक जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे है, उन्हें नागरिकता दी जाएगी और बाकी को निर्वासित किया जाएगा. साल 1951 मेंएनआरसी तैयार किया गया था तब से इसे सात बार जारी करने की कोशिशें हुईं. अंततः, साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह सूची जारी हुई है.


पृष्ठभूमि

30 जुलाई 2018 को प्रकाशित मसौदे में कुल 3.29 करोड़ आवेदनों में से 2.9 करोड़ लोगों का नाम शामिल किया गया था. जबकि मसौदे में 40 लाख लोगों को छोड़ दिया गया है. वहीं, 31 दिसंबर को प्रकाशित पहले मसौदे में 1.9 करोड़ नाम थे. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में असम में एनआरसी अपडेट किया जा रहा है और अंतिम सूची 31 जुलाई को जारी होने वाली है.

मराठा आरक्षण: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरक्षण को जायज़ करार दिया

मराठा आरक्षण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने 27 जून 2019 को अपना फैसला सुना दिया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की वैधता को बरकरार रखा है. कोर्ट ने कहा है कि मराठा आरक्षण को 16 फीसदी से घटाकर 12 या 13 फीसदी करना चाहिए.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा की राज्य सरकार को आरक्षण देने का अधिकार है. अदालत ने एसईबीसी (SEBC) के कमीशन की रिपोर्ट को माना है. गायकवाड़ कमीशन रिपोर्ट के अनुसार, 12-13% आरक्षण दिया जाना चाहिए और इस बात को कोर्ट भी मानता है.

मराठा आरक्षण पर फैसला आने से पहले मुंबई पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी थी, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए मुंबई पुलिस पहले से तैयार रहे. महाराष्ट्र के लोगों में खुशी की लहर है. अब उन्हें महाराष्ट्र की सरकारी नौकरियों में भी आरक्षण मिलेगा.

महाराष्ट्र सरकार ने साल 2018 में मराठा समुदाय के लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरी में 16 फीसदी आरक्षण दिया था. हाइकोर्ट में इसके खिलाफ और समर्थन में कई याचिकाएं दायर की गई है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 26 मार्च 2019 को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण के खिलाफ दायर उस याचिका पर 24 जून को विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी.


मराठा आरक्षण कब लागू हुआ था?

महाराष्ट्र विधानसभा ने 30 नवंबर 2018 को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) श्रेणी के तहत मराठों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव पारित किया था. आरक्षण को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में कई याचिकाएँ दायर की गईं थी.

लंबे समय तक चला आंदोलन

महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में मराठा समुदाय ने आरक्षण की मांग को लेकर कई बड़े मोर्चे निकाले गए थे.

आरक्षण की मांग 1980 के दशक से लंबित:

मराठों के आरक्षण की मांग 1980 के दशक से लंबित पड़ी थी. राज्य पिछड़ा आयोग ने 25 विभिन्न मानकों पर मराठों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक आधार पर पिछड़ा होने की जांच की. इसमें से सभी मानकों पर मराठों की स्थिति दयनीय पाई गई. इस दौरान किए गए सर्वे में करीब 43 हजार मराठा परिवारों की स्थिति जानी गई.

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