यह परियोजना 3.5 वर्षों की पायलट चरण की होगी, जिसे हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड और कर्नाटक में साढ़े तीन साल के पायलट चरण के दौरान लागू किया जाएगा।
परियोजना का उद्देश्य भारतीय राज्यों के लिये उत्तम कार्य प्रणाली और निगरानी प्रोटोकॉल को विकसित करना तथा अनुकूल बनाना और पांच पायलट राज्यों के भीतर क्षमता का निर्माण करना है।
परियोजना के आगे के चरणों में पूरे देश में इसका विस्तार किया जाएगा।







