सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस अधिनियम को वर्ष 2005 में रद्द कर दिया गया। क्योंकि यह अधिनियम बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उनको निर्वासित करने में एक बड़ी बाधा बना हुआ था।
✅ हॉन्गकॉन्ग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 1842 में चीन राजवंश के प्रथम अफीम युद्ध में पराजित होने के बाद चीन ने बिटिश साम्राज्य को हॉन्गकॉन्ग द्वीप सौंप दिया था, उसके बाद हॉन्गकॉन्ग का (एक अलग भू-भाग) आस्तित्व सामने आया।
लगभग 6 दशक के दौरान चीन के लगभग 235 अन्य द्वीप भी ब्रिटेन के कब्जे में आ गए और हॉन्गकॉन्ग अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र बन गया।
20वीं सदी के प्रारंभ में यहाँ भारी संख्या में शरणार्थियों का आगमन हुआ जिनमें चीनी लोगों की संख्या सबसे ज़्यादा थी।
बड़ी संख्या में प्रवासियों के आगमन ने हॉन्गकॉन्ग के लिये एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में एक नई भूमिका निभाने में मदद की।
चीन की अर्थव्यवस्था एवं भौगोलिक स्थिति के प्रभाव के कारण वर्तमान में हॉन्गकॉन्ग सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था के साथ-साथ दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों के लिये एक महत्त्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन गया है।
वर्ष 1997 तक हॉन्गकॉन्ग ब्रिटिश साम्राज्य के नियंत्रण में था।
'वन कंट्री, टू सिस्टम्स' (One Country, Two Systems) के सिद्धांत के तहत, हॉन्गकॉन्ग 1 जुलाई, 1997 को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (Special Administrative Region-SAR) बन गया।
इस व्यवस्था से शहर को अपनी पूँजीवादी व्यवस्था को बनाए रखने के लिये स्वायत्तता, स्वतंत्र न्यायपालिका और कानून का शासन, मुक्त व्यापार एवं बोलने की स्वतंत्रता, आदि की अनुमति मिलती है।
✔️भौगोलिक अवस्थिति
चीन के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित, पर्ल नदी डेल्टा और दक्षिण चीन सागर पर स्थित।
अपनी भौगोलिक स्थिति की रणनीतिक विशेषता के कारण यह दुनिया के सबसे संपन्न और महानगरीय शहरों में से एक है।
अपनी भौगोलिक अवस्थिति, विभिन्न एतिहासिक परम्पराओं, विविध संस्कृतियों और पूर्व-पश्चिम का सम्मिश्रण ही इसकी प्रमुख विशेषता है।







