Tuesday, September 17, 2019

☞   नवजात ब्लैकहोल में गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने में कामयाबी

चर्चा में क्यों?

हाल ही में Physical Review Letters नामक एक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पहली बार वैज्ञानिकों ने एक नवजात ब्लैकहोल (Newly Born Black Hole) में गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने में सफलता प्राप्त की है।

प्रमुख बिंदु

  • इन तरंगों के घूमने के पैटर्न के आधार पर ब्लैक होल के द्रव्यमान एवं उसके घूमने की गति के विषय में अनुमान लगाया जा सकता है।
  • इससे आइंस्टीन के जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी यानी सापेक्षता के सिद्धांत (Einstein’s General Theory of Relativity) के साक्ष्यों को और अधिक बल मिलता है।

सापेक्षता का सिद्धांत

  • 20वीं सदी की शुरुआत में भौतिक वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन (1879-1955) द्वारा प्रस्तावित ‘सापेक्षता का सिद्धांत’ मानव इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है।
  • हालाँकि आइंस्टीन द्वारा सापेक्षता की अवधारणा को प्रस्तुत नहीं किया गया था।
  • आइंस्टीन के अनुसार निर्वात में प्रकाश की गति स्थिर होती है तथा गति की एक पूर्ण भौतिक सीमा भी होती है। यह किसी व्यक्ति के रोज़मर्रा के जीवन पर कोई ज़्यादा प्रभाव नहीं डालता है, क्योंकि हमारी गति प्रकाश की गति से काफी कम हैं।
  • सापेक्षता सिद्धांत यह बताता है कि पृथ्वी पर एक पर्यवेक्षक के दृष्टिकोण से एक वस्तु धीमी गति और कम दूरी से गति करती है।
  • सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड में किसी भी वस्तु की ओर जो गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव दिखाई देता है उसका वास्तविक कारण यह है कि प्रत्येक वस्तु अपने मान एवं आकार के अनुसार अपने इर्द-गिर्द एक दिक्-काल (स्पेस-टाइम) में ऐंठन उत्पन्न करती है।
Blackhole

क्यों महत्त्वपूर्ण है यह अध्ययन

  • वैज्ञानिकों की इस सफलता से इस बात की संभावना और बढ़ गई है कि ब्लैक होल केवल अपने तीन गुणों को प्रदर्शित करता है, जिसमें द्रव्यमान, घूर्णन (स्पिन) और इलेक्ट्रिक चार्ज शामिल हैं।
  • इन तीनों में विशेष बात यह है कि इन तीनों का अवलोकन किया जा सकता है, जबकि अन्य गुणों का अवलोकन नहीं किया जा सकता है, इसका कारण यह है कि अन्य सभी ब्लैक होल में ही समा जाते हैं।
  • अमेरिका में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Massachusetts Institute of Technology-MIT) के शोधकर्त्ताओं की टीम ने गुरुत्वाकर्षण के घूर्णन की गणना कर कहा कि ब्लैक होल में भौतिकविद् अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत का उपयोग होना चाहिये।
  • इस अध्ययन के अनुसार, यह गणना ब्लैक होल के द्रव्यमान और घूर्णन के पहले के माप से मेल खाती है।
  • इससे पहले वैज्ञानिकों द्वारा केवल सामान्य सापेक्षता के सही होने की संभावना व्यक्त की जाती थी, यह पहली बार है जब इसकी पुष्टि की गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार आइंस्टीन के सिद्धांत का सीधे परीक्षण करने वाली यह पहली प्रायोगिक माप थी।

पूर्व की खोज

  • इससे पहले भी वैज्ञानिकों ने दो स्पायरलिंग ब्लैक होल में गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाया था, जो बाद में आपस में टकराने के बाद एक ब्लैक होल में समा गए थे।
  • इस दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि जब दोनों ब्लैक होल एक-दूसरे से टकराए तो उस समय गुरुत्वीय तरंगों की गति सबसे अधिक तीव्र हो गई थी।

ब्लैक होल क्या है?

ब्लैक होल (कृष्ण छिद्र/कृष्ण विवर) शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले अमेरिकी भौतिकविद् जॉन व्हीलर ने 1960 के दशक के मध्य में किया था।
  • ब्लैक होल्स अंतरिक्ष में उपस्थित ऐसे छिद्र हैं जहाँ गुरुत्व बल इतना अधिक होता है कि यहाँ से प्रकाश का पारगमन नहीं होता।
  • चूँकि इनसे प्रकाश बाहर नहीं निकल सकता, अतः हमें ब्लैक होल दिखाई नहीं देते, वे अदृश्य होते हैं।
  • हालाँकि विशेष उपकरणों से युक्त अंतरिक्ष टेलिस्कोप की मदद से ब्लैक होल की पहचान की जा सकती है।
  • ये उपकरण यह बताने में भी सक्षम हैं कि ब्लैक होल के निकट स्थित तारे अन्य प्रकार के तारों से किस प्रकार भिन्न व्यवहार करते हैं।

4 comments:

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