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कुछ दिनों पहले भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पैंगोंग त्सो झील (Pangong Tso Lake) के समीप लद्दाख में तनाव की स्थिति देखने को मिली। PTI द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अब इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है।
Pangong Tso Lake
लगभग दो साल पहले भी पूर्वी लद्दाख के क्षेत्र में इसी तरह की एक घटना हुई थी। इसका कारण यह है कि इस क्षेत्र में वास्तविक रूप से LAC कहाँ है इसे लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, LAC के संबंध में अलग-अलग धारणाएँ हैं।
पैंगोंग त्सो
(Pangong Tso)
लद्दाखी भाषा में पैंगोंग का अर्थ है समीपता और तिब्बती भाषा में त्सो का अर्थ है झील।
पैंगोंग त्सो लद्दाख हिमालय में 14,000 फुट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित एक लंबी संकरी, गहरी, एंडोर्फिक (लैंडलॉक) झील है।
पैंगोंग त्सो का पश्चिमी छोर लेह के दक्षिण-पूर्व में 54 किमी. दूर स्थित है।
135 किमी. लंबी यह झील बुमेरांग (Boomerang) के आकार में 604 वर्ग किमी. में फैली हुई है और अपने सबसे विस्तारित बिंदु पर यह 6 किमी. चौड़ी है।
खारे पानी की यह झील शीत ऋतु में जम जाती है, यह आइस स्केटिंग (Ice Skating) और पोलो के लिये एक उत्तम स्थान है।
इसका जल खारा होने के कारण इसमें मछली या अन्य कोई जलीय जीवन नहीं है। परंतु यह कई प्रवासी पक्षियों के लिये एक महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल है।
इस झील का 45 किलोमीटर क्षेत्र भारत में स्थित है, जबकि 90 किलोमीटर क्षेत्र चीन में पड़ता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा इस झील के मध्य से गुज़रती है।
19वीं शताब्दी के मध्य में यह झील जॉनसन रेखा के दक्षिणी छोर पर थी। जॉनसन रेखा अक्साई चीन क्षेत्र में भारत और चीन के बीच सीमा निर्धारण का एक प्रारंभिक प्रयास था।
वर्ष 2017 की घटना
19 अगस्त, 2017 में एक वीडियो ऑनलाइन पोस्ट हुआ था जो पैंगोंग झील के किनारे कुछ भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई कथित हाथापाई की खबरों की पुष्टि करता है।
सामान्य तौर पर जब दो गश्ती दल आमने-सामने आते हैं तो एक "बैनर ड्रिल" (Banner Drill) का प्रदर्शन करते हैं जिसमें एक बैनर प्रदर्शित करते हुए दूसरे पक्ष से अपना क्षेत्र खाली करने के लिये कहा जाता है।
रणनीतिक महत्त्व
LAC रेखा झील के मध्य से होकर गुजरती है, लेकिन भारत और चीन इसकी सटीक स्थिति के विषय में सहमत नहीं हैं।
इस झील का 45 किमी. लंबा पश्चिमी भाग भारतीय नियंत्रण में, जबकि शेष चीन के नियंत्रण में है।
दोनों सेनाओं के बीच अधिकांश झड़पें झील के विवादित हिस्से में होती हैं। हालाँकि इसके इतर झील का कोई विशेष सामरिक महत्त्व नहीं है।
लेकिन यह झील चुशूल घाटी के मार्ग में आती है, यह एक मुख्य मार्ग है जिसका चीन द्वारा भारतीय-अधिकृत क्षेत्र में आक्रमण के लिये उपयोग किया जा सकता है।
वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान यही वह स्थान था जहाँ से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था, भारतीय सेना ने चुशूल घाटी (Chushul Valley) के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेज़ांग ला (Rezang La) से वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा था।
रेज़ांग ला
(Rezang La)
यह केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख क्षेत्र में चुशूल घाटी के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक पहाड़ी दर्रा है।
इसकी लंबाई लगभग 2.7 किमी., चौड़ाई 1.8 किमी. और ऊँचाई 16000 फुट है।
वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में रेज़ांग ला कुमाऊँ रेजिमेंट के 13 कुमाऊँ दस्ते का अंतिम मोरचा था। इस दस्ते का नेतृत्व मेजर शैतान सिंह ने किया था। इस युद्ध को 'रेज़ांग ला का युद्ध' नाम से जाना जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में चीनियों ने पैंगोंग त्सो के अपनी ओर के किनारों पर सड़कों का निर्माण भी किया है।
चीन के निंग्ज़िया हुई (Ningxia Hui) स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी यिनचुआन (Yinchuan) के दक्षिण-पश्चिम में मिनिंगज़ेन (Minningzhen) में PLA के हुआंगयांगटन (Huangyangtan) बेस में अक्साई चीन (भारत और चीन के मध्य विवादित क्षेत्र) में इस विवादित क्षेत्र का एक दो-स्तरीय मॉडल भी मौजूद है। यह चीन के लिये इस क्षेत्र के महत्त्व को स्पष्ट रूप से इंगित करता है।
चुशूल घाटी
(Chushul valley)
चुशूल केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के लेह ज़िले में समुद्र तल से 4,300 मीटर या 15,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक गाँव है।
यह चुशूल घाटी में अवस्थित है।
चुशूल घाटी रेज़ांग ला (दर्रा) और पांगोंग त्सो (झील) के पास स्थित है।
क्षेत्र में विवाद
वर्ष 1999 में जब ऑपरेशन विजय के लिये इस क्षेत्र से सेना की टुकड़ी को कारगिल के लिये रवाना किया गया, तो चीन को भारतीय क्षेत्र के अंदर 5 किमी. तक सड़क बनाने का अवसर मिल गया। यह स्पष्ट रूप से चीन की आक्रामकता को इंगित करता है।
वर्ष 1999 में चीन द्वारा निर्मित सड़क इस क्षेत्र को चीन के व्यापक सड़क नेटवर्क से जोड़ती है, यह G219 काराकोरम राजमार्ग से भी जुड़ती है।
इन सड़कों के माध्यम से चीन की स्थिति भौगोलिक रूप से पैंगोंग झील के उत्तरी सिरे पर स्थित भारतीय स्थानों की उपेक्षा अधिक मज़बूत बनी हुई है।
झील के उत्तरी किनारे पर उपस्थित पहाड़ यहाँ एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जिसे सेना "फिंगर्स" (Fingers) के नाम से संबोधित करती है। भारत का दावा है कि LAC फिंगर 8 से जुड़ी है।
चीनी आक्रामकता का क्या कारण है?
यदि जल शक्ति के संदर्भ में बात करें तो कुछ वर्ष पहले तक इस क्षेत्र में चीन की स्थिति अधिक मज़बूत थी, लेकिन करीब सात साल पहले भारत ने बेहतर गति एवं तकनीक वाली नौकाएँ खरीदी हैं, ताकि इस क्षेत्र में अधिक तेज़ी से आक्रामक प्रतिक्रिया की जा सके।
हालाँकि दोनों ओर से गश्ती नौकाओं के विस्थापन के लिये बेहतर ड्रिल की व्यवस्था मौजूद है, पिछले कुछ वर्षों में जल के मुद्दों पर टकराव के कारण भी तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है।
उच्च गति वाली नौकाओं के शामिल होने से स्पष्ट रूप से चीनियों के व्यवहार में अधिक आक्रामकता आई है, जिसके चलते पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अधिक तनाव की स्थिति देखने को मिली है।
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