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अपने स्थापना दिवस के अवसर पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR) ने वर्ष 2019 के लिये शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त करने वाले विजेताओं की सूची जारी की है। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिये यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
Bhatanagar Award
देश भर के विभिन्न संस्थानों से प्रत्येक वर्ष 45 वर्ष से कम आयु के कई वैज्ञानिकों को चुनकर उनके पिछले पाँच वर्षों के दौरान किये गए उत्कृष्ट वैज्ञानिक कार्य के लिये सम्मानित किया जाता है।
विभिन्न श्रेणियों में इस वर्ष के विजेताओं की सूची इस प्रकार है:
क्र.सं.श्रेणीविजेता1.जीव विज्ञान1. कायरत साईंकृष्णन (Kayarat Saikrishnan)- भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, पुणे
2. सौमेन बसक (Soumen Basak)- नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इम्युनोलॉजी, नई दिल्ली
2. जावेद अली (एल. वी. प्रसाद आईज इंस्टिट्यूट, हैदराबाद)
7.भौतिक विज्ञान1. अनिन्दा सिन्हा (IISc, बंगलूरू)
2. शंकर घोष (टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान, मुंबई)
"शोध शुद्धि" सॉफ्टवेयर
(Shodh Shuddhi)
21 सितंबर, 2109 को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने "शोध शुद्धि" (Shodh Shuddhi) सॉफ्टवेयर लॉन्च किया।
"शोध शुद्धि" साहित्यिक चोरी निरोधी सॉफ्टवेयर (Plagiarism Detention Software- PDS) है।
यह सेवा विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commision- UGC) के एक अंतर विश्वविद्यालय केंद्र (Inter University Centre- IUC), सूचना और पुस्तकालय नेटवर्क (Information and Library Network- INFLIBNET) द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही है।
यह सॉफ्टवेयर शोधार्थियों के मूल विचारों एवं लेखों की मौलिकता को सुनिश्चित करते हुए अनुसंधान परिणामों की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करेगा।
यह सेवा शुरुआत में लगभग 1000 विश्वविद्यालयों/संस्थानों [केंद्रीय विश्वविद्यालयों, केंद्र द्वारा वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों, राज्यों के सरकारी विश्वविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों, अंतर विश्वविद्यालय केंद्रों (IUC) और राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थानों को प्रदान की जा रही है।
साहित्यिक चोरी
साहित्यिक चोरी का तात्पर्य किसी लेखक या शोधकर्त्ता के मूल विचारों, भावों तथा भाषा का अवैध प्रकाशन एवं उस पर किसी अन्य लेखक द्वारा दावे से है।
साहित्यिक चोरी को अकादमिक बेईमानी और पत्रकारिता की नैतिकता के विरुद्ध माना जाता है।
सूचना और पुस्तकालय नेटवर्क
(Information and Library Network- INFLIBNET)
वर्ष 1991 में गांधीनगर (गुजरात) में स्थापित यह एक स्वायत अंतर विश्वविद्यालय केंद्र है।
यह पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण एवं सूचना के हस्तांतरण और पहुँच के लिये सूचना केंद्र के रूप में कार्य करता है।
यह देश भर में लगभग 264 विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों में पुस्तकालयों के राष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से छात्रवृत्ति एवं शिक्षण तथा अकादमिक गतिविधियों का समर्थन करना।
गालो जनजाति
(Galo Community)
गालो जनजाति अरुणाचल प्रदेश की प्रमुख जनजाति है इस जनजाति को वंश वृतांत (Genealogical) परंपरा के लिये जाना जाता है।
Galo Community
गालो, तिब्बती और मंगोलियाइड वंश से संबंधित है। ये मूलतः तिब्बत से प्रवास करके यहाँ आए हैं।
इस समुदाय की जनसंख्या लगभग 1.5 लाख है। यह समुदाय अरुणाचल का 4वांँ बड़ा समुदाय है।
इस समुदाय की अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग, लेपा राडा (Lepa Rada), लोअर सिक्यांग, पूर्वी सिक्यांग, ऊपरी सुबनसिरी और नामसाई (Namsai) ज़िलों में बड़ी आबादी है।
ये तानी समुदाय से संबंधित है। तानी समुदाय असम, अरुणाचल और तिब्बत में निवास करता है।
दोनों समुदाय आबोतनी (Abotani) तथा पेडोंग नेने (Pedong Nene) को अपना पूर्वज मानते हैं।
गालो जनजाति अपने पूर्वजों के नाम को आने वाली पीढ़ियों के नाम से जोड़ती है जैसे पिता का नाम पुत्र के नाम से पूर्व लगता है एवं पिता के पूर्वजों का नाम उसके बाद लगाया जाता है।
यह समुदाय की आजीविका का प्रमुख स्रोत कृषि है। इस जनजाति की महिलाएँ कृषि अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है।
आदि भाषा (Adi language) में इस कबीले या बहिर्जात समूह को ओपिन (Opins) और अल्ट (Alt) कहा जाता है।
गालो समुदाय में सभी अनुष्ठान संस्कार न्यीबो (पुजारी)नामक एक वर्ग द्वारा करवाया जाता है।
सैद्धांतिक तौर पर किसी महिला के न्यीबो (Nyibo) बनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है लेकिन सामान्यतः किसी महिला के पुजारी बनने के कोई उदाहरण नहीं हैं।
संविधान आदेश, 1950, भाग- XVIII में संशोधन के अनुसार गालो समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में मान्यता दी गई है।
मोपिन इनका प्रमुख त्योहार है जो गाँवों की समृद्धि के लिये मनाया जाता है।
गालो जनजाति के लोग पोपिर नृत्य करते हैं।
अरुणाचल प्रदेश की अन्य जनजातियाँ
मिशिंग (Mising)
आदी (Adi)
अपतानी (Apatani)
निशि (Nyishi)
तागिन (Tagin)
यूनाइटेड नेशन चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड
UN Champions of the Earth award 2019 (UNEP)
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने आधिकारिक रूप से 12 पर्यावरण चेंजमेकर्स को UN चैंपियंस ऑफ अर्थ अवार्ड 2019 और यंग चैंपियंस ऑफ़ द अर्थ पुरस्कार से सम्मानित किया है।
Champion of the Earth
यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान है। यह पुरस्कार हर साल सरकार, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के उत्कृष्ट नेताओं को दिया जाता है जिनके कार्यों का पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
दुनिया भर के सात युवाओं को यंग चैंपियंस ऑफ़ द अर्थ पुरस्कार से सम्मानित किया गया जिनके उत्कृष्ट विचार उनके स्थानीय संदर्भों में पर्यावरण की रक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण हैं। उल्लेखनीय है कि यंग चैंपियंस ऑफ़ द अर्थ पुरस्कार पहली बार वर्ष 2017 में दिये गए थे।
इस बार कोस्टा रिका (Costa Rica) गणराज्य को नीति नेतृत्व की श्रेणी में चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड पुरस्कार प्रदान किया गया है। ध्यातव्य है कि वर्ष 2018 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस श्रेणी के तहत चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
यह पुरस्कार कोस्टा रिका के राष्ट्रपति कार्लोस अल्वाराडो क्वासाडा ने अपने देश की ओर से प्राप्त किया।
कोस्टा रिका ने प्रकृति के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिये महत्वाकांक्षी नीतियों के प्रति अनुकरणीय प्रतिबद्धता दिखाई है।
यह पुरस्कार कुल 5 श्रेणियों में दिया गया है।
चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड, 2019क्र. सं.पुरस्कार की श्रेणीविजेता1.प्रेरणा और कार्यवाही (Inspiration and Action category)आँट फॉरेस्ट (Ant Forest): एक डिजिटल पहल2.विज्ञान और नवाचार (Science and Innovation)प्रोफेसर कैथरिन हेहो (Katharine Hayhoe) : कनाडा की एक प्रमुख जलवायु वैज्ञानिक3.उद्यमशीलता दृष्टिकोण (Entrepreneurial Vision)पेटागोनिया:अमेरिका स्थित कपड़ा ब्रांड4.प्रेरणा और कार्यवाहीफ्राइडे फॉर फ्यूचर: युवा जलवायु आंदोलन5.नीति नेतृत्त्व (Policy Leadership)कोस्टा रिका गणराज्य
पृष्ठभूमि
यह पुरस्कार वर्ष 2005 में शुरू किया गया।
यह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वरा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
यह पुरस्कार सरकार, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के उन उत्कृष्ट नेतृत्व कर्त्ताओं को प्रदान किया जाता है जिनके कार्यों का पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
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