
दिल बेताब है तेरी, झलक के लिए।
आजा लौट के मेरी,दोस्ती के लिए।
हम हँसते थे ,हम गाते थे संग।
साथ रहने की,दिल में थी उमंग।
खुद रोता था,तेरी हँसी के लिए।
आजा लौट के मेरी,दोस्ती के लिए।
तेरे बिना मेरे यारा,सब सूना लगता ।
तुम साथ होते,जीवन हसीन लगता।
तुझे मैं मनाऊ, तुझे पाने के लिए।
आजा लौट के मेरी,दोस्ती के लिए।
मेरी दोस्ती का ये कैसा सिला है।
तुमसे बिछड़ने का,दर्द मिला है
अब ना तड़पा, मेरी ख़ता के लिए।
आजा लौट के मेरी,दोस्ती के लिए।
खुशी के पल मिलते है ना कहीं।
जहाँ पहले था हूँ आज वही।
तेरा साथ चाहिए,मेरी मंजिल के लिए।
आजा लौट के मेरी,दोस्ती के लिए।
मेरी खुशी भी मालिक उसके नाम लिख दे।
बस मुझे मेरा दोस्त वापस कर दे।
तुझ से मन्नत मांगी,अपनी यारी के लिए।
आजा लौट के मेरी,दोस्ती के लिए।
दिल बेताब है तेरी, झलक के लिए।
आजा लौट के मेरी,दोस्ती के लिए।
✍✍✍जितेन्द्र रावत।








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