Saturday, August 31, 2019

☞   ✅ आर्टिकल 370 का संक्षिप्त इतिहास ✅


_भारत को आजादी मिलने के बाद *20 अक्टूबर, 1947* को पाकिस्तान समर्थित ‘आजाद कश्मीर सेना’ ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर कश्मीर पर आक्रमण कर दिया और काफी हिस्सा हथिया लिया था. इस हिस्से को आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) कहा जाता है._

_इस परिस्थिति में महाराजा हरि सिंह ने जम्मू&कश्मीर की रक्षा के लिए उस समय कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख़ अब्दुल्ला की सहमति से जवाहर लाल नेहरु के साथ मिलकर *26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ जम्मू&कश्मीर के अस्थायी विलय की घोषणा कर दी और "Instruments of Accession of Jammu & Kashmir to India" पर अपने हस्ताक्षर कर दिये थे.* इस नये समझौते के तहत जम्मू & कश्मीर ने भारत के साथ सिर्फ *तीन विषयों: रक्षा, विदेशी मामले और संचार को भारत के हवाले कर दिया था.*_

_समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत सरकार ने वादा किया कि “'इस राज्य के लोग अपने स्वयं की संविधान सभा के माध्यम से राज्य के आंतरिक संविधान का निर्माण करेंगे और जब तक राज्य की संविधान सभा शासन व्यवस्था और अधिकार क्षेत्र की सीमा का निर्धारण नहीं कर लेती हैं तब तक भारत का संविधान केवल राज्य के बारे में एक अंतरिम व्यवस्था प्रदान कर सकता है._

_संविधान सभा के अध्यक्ष _डॉ. भीमराव आंबेडकर कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने के पक्ष में नहीं थे._ मगर *पंडित नेहरू के कहने पर गोपाल स्वामी आयंगर ने अनुच्छेद 370 का प्रस्ताव संविधान सभा में प्रस्तुत किया था* और यह *17 नवंबर 1952* से लागू है._

_*आर्टिकल 370 के हटने से निम्न परिवर्तन होंगे;*_

_*1.* आर्टिकल 370 के अनुसार रक्षा, विदेशी मामले और संचार को छोड़कर बाकी सभी कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है लेकिन आर्टिकल 370 के हटते ही कोई भी कानून राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हो जायेगा._

_*2.* आर्टिकल 370 के कारण जम्मू & कश्मीर का अपना संविधान है और इसका प्रशासन इसी के अनुसार चलाया जाता है ना कि भारत के संविधान के अनुसार.यदि आर्टिकल 370 को हटा दिया जाता है तो कश्मीर का प्रशासन भी भारत के संविधान के अनुसार चलेगा._

_*3.* जम्मू & कश्मीर के पास 2 झन्डे हैं. एक कश्मीर का अपना राष्ट्रीय झंडा है और भारत का तिरंगा झंडा भी यहाँ का राष्ट्रीय ध्वज है._
_*यदि आर्टिकल 370 को हटा दिया जाता है तो कश्मीर का झंडा ख़त्म हो जायेगा.*_

_*4.* देश के दूसरे राज्यों के नागरिक इस राज्य में किसी भी तरीके की संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं. अर्थात इस राज्य में संपत्ति का मूलभूत अधिकार अभी भी लागू है लेकिन_ _आर्टिकल 370 के हटने के साथ ही अन्य भारतीय लोगों को कश्मीर में जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदने की अनुमति मिल जाएगी और रहने/बसने का अधिकार भी मिल जायेगा._

_*5.* कश्मीर के लोगों को 2 प्रकार की नागरिकता मिली हुई है; जो कि ख़त्म हो जाएगी और सबको केवल भारत का नागरिक माना जायेगा._

_*6.* अभी *यदि कोई कश्मीरी महिला किसी भारतीय से शादी कर लेती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता ख़त्म हो जाती है लेकिन आर्टिकल 370 के हटने के बाद ऐसा नहीं होगा क्योंकि दोनों ही भारत के नागरिक हो जायेंगे.*_

_*7.* यदि कोई पाकिस्तानी लड़का किसी कश्मीरी लड़की से शादी कर लेता है तो उसको भारतीय नागरिकता भी मिल जाती है लेकिन आर्टिकल 370 के हटते ही कोई भी पाकिस्तानी शादी करके मान्यता प्राप्त नहीं कर पायेगा._

_*8.* भारतीय संविधान के भाग 4 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) और भाग 4 A (मूल कर्तव्य) इस राज्य पर लागू नहीं होते हैं. अर्थात आर्टिकल 370 के हटते ही कश्मीर के लोगों को भारत के संविधान में लिखे गये मूल कर्तव्यों को मानना अनिवार्य हो जायेगा और उनको महिलाओं की अस्मिता, गायों की रक्षा करनी पड़ेगी._

_*9.* जम्मू एंड कश्मीर में भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों (राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज इत्यादि) का अपमान करना अपराध की श्रेणी में आ जायेगा._

_*10.*  जम्मू कश्मीर में आर्थिक आपातकाल (अनुच्छेद 360) लगाया जा सकेगा._

_*11.* सम्पूर्ण भारत में राष्ट्रीय आपातकाल लगते ही यह पूरे कश्मीर में भी लागू हो जायेगा. राष्ट्रपति के विशेष आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी._

_*12.* सूचना का अधिकार और शिक्षा का अधिकार जैसे कानून कश्मीर में भी लागू होने लगेंगे._

_*13.* राज्य सरकार की नौकरियों में अन्य राज्यों के लोग भी सेलेक्ट हो सकेंगे._
─⊱━•┄┄•◆𖣥🌹🌹𖣥◆•┄┄•━⊰─
           ─⊱━━━⊱❤⊰━━━⊰─

✅ विधानपरिषद वाले राज्य

✅वर्तमान में छह राज्यों में विधानपरिषद अस्तित्व में हैं।

✅जम्मू-कश्मीर में भी इसके द्वि-भाजन (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश) के पूर्व विधानपरिषद मौजूद थी।

✅तमिलनाडु की तत्कालीन सरकार ने विधानपरिषद गठित करने के लिये एक अधिनियम पारित किया था, लेकिन 2010 में सत्ता में आई नई सरकार ने इसे वापस ले लिया।

✅वर्ष 1958 में गठित आंध्र प्रदेश विधानपरिषद को वर्ष 1985 में समाप्त कर दिया गया था। वर्ष 2007 में इसका पुनर्गठन किया गया।

✅ओडिशा विधानसभा ने हाल ही में एक विधानपरिषद के गठन के लिये संकल्प पारित किया है।

✅राजस्थान और असम में विधानपरिषद के गठन के प्रस्ताव संसद में लंबित हैं।


🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

📍अंटार्कटिक संधि (Antarctic Treaty) 

✔️अंटार्कटिक संधि को वाशिंगटन संधि के नाम से भी जाना जाता है।

💥इस संधि पर आरम्भ में 12 देशों- अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, चिली, फ्राँस, जापान, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे, दक्षिण अफ्रीका, तत्कालीन सोवियत संघ, युनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका ने वाशिंगटन में हस्ताक्षर किये।

✅बाद में 27 अन्य देशों ने इस संधि को स्वीकार किया और 23 जून, 1961 को यह संधि प्रभाव में आई।


🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

NCERT पढ़ना ज़रूरी है, मिथक या वास्तविकता ??? 

Or,

NCERT की किताबें कितनी महत्वपूर्ण हैं  ?! 



वह हर व्यक्ति जो सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है, वह हर शिक्षक जो सिविल सेवा की तैयारी करवा रहे हैं,या जिसने भी सिविल सेवा परीक्षा पास की है; NCERT की किताबों को सिविल सेवा परीक्षाओं में सफलता के लिए महत्वपूर्ण आधार और ज़रूरी बताते हैं. सिविल सेवा की तैयारी शुरू करते ही हर छात्र NCERT की  कमोबेश सभी किताबें ज़रूर उठा लाते हैं और जैसे -जैसे अध्ययन में अन्य किताबें, कोचिंग नोट्स, या अन्य अध्ययन स्रोत के जुड़ते जाते हैं; NCERT की किताबों को किनारे रख देते हैं. कुछ छात्र NCERT की किताबें ख़रीद तो लाते हैं लेकिन बमुश्किल कुछ पन्नों का अध्ययन कर दुबारा खोलते तक  नहीं ! 

आख़िर NCERT के संबंध में, सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के भीतर कौन सी अवधारणा घर कर गयी है, और क्यों… 

कोचिंग नोट्स की तरह NCERT की किताबें सिविल सेवा के छात्रों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर लिखी भी नहीं गयी है. बल्कि सच ये है कि NCERT की किताबें स्कूल के छात्रों के मानसिक स्तर और उनकी ज़रूरतों को ध्यान में  रखते हुए लिखी गयी हैं, जिसके माध्यम से बच्चों का विषय में प्रवेश सहज और सरल हो. 

ऐसा क्या है कि सिविल सेवा की तैयारी कर रहे, उच्च शिक्षा प्राप्त छात्रों के लिए भी किसी विषय का बेसिक अध्ययन एक चुनौती बन जाता है. उत्तर, किताबों का जटिल स्तर होना नहीं बल्कि छात्रों की आम मानसिकता है. 

छात्रों के मन में शुरुआत से ही यह बात बैठा दी जाती है कि यह सभी परीक्षाओं में सबसे कठिनतम परीक्षा है, तथा इसकी तैयारी में सबसे अधिक सूचनाओं और विषय-वस्तुओं का अध्ययन करना आवश्यक होता है.  

यह अवधारणा वह शिक्षक भी छात्रों के सामने दुहराते रहते हैं जो NCERT की किताबों को आसान लेकिन  बिलकुल ज़रूरी  बताते हैं. 

होता ये है कि जब छात्र NCERT किताबों को पहली नज़र में देखते हैं तो उन्हें बेहद सरल और सामन्य लगता है और छात्रों का यह विश्वास कमज़ोर पड़ जाता है कि इतनी सरल किताबें उन्हें कठिनतम परीक्षा की सफलता में सहयोगी भी हो सकती हैं. परीक्षा में पूछे जा रहे जटिल सवालों को सीधे इन किताबों में ढूँढ पाना कठिन होने के कारण यह विश्वास भी दृढ़ हो जाता है कि प्रारम्भिक अथवा मुख्य परीक्षाओं के लिए इन किताबों से संभवतः पर्याप्त संख्या में सवाल हल करने में मदद ना मिले. इन कारणों से NCERT किताबों का अध्ययन समय का सही उपयोग नहीं लगता है.   

NCERT से जुड़ी अवधारणा के मिथक/वास्तविकता को समझने के लिए अगले आलेख/ अंक में हम और गहन विश्लेषण करेंगे. 

आप हमारे चैनल से जुड़े रहें. .  .

0 comments:

Post a Comment

यदि आपको हमारे वेबसाइट पर पढ़ रहे पोस्ट अच्छे और काम के लग रहे है तो कृपया Comment Box में लिखना न भूले यदि आपका कोई प्रश्न या सुझाव हो तो हमे comment करे या हमारे दिए हुए email पर ईमेल जरूर करे। studieshubs@gmail.com


टेक्नोलॉजी और इंटरनेट की दुनिया से आप सभी को अप टू डेट रखने के लिए हमने यह वेबसाइट लॉन्च किया है । हमारे इस वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य है कि हम अपने भारत वासियों को अपनी मातृभाषा हिंदी में टेक्नोलॉजी और इंटरनेट से जुड़ी जानकारी साझा कर सकें। और पढ़ें

Advertisement Adnow

Popular Posts of The month

Amazon Offers

 
अब पाये सभी सरकारी नौकरी और उनसे जुड़े हुए किसी भी सवालो के जवाब हमारी website पर सबसे पहले