Thursday, July 2, 1970
☞ शब-ए-बारात (SHAB-E-BARAT FESTIVAL)
July 02, 1970
भारत मे त्योहार एवं मेलें
शब-ए-बारात का पर्व मुस्लिमों द्वारा मनाये जाने वाले प्रमुख पर्वों में से एक है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह पर्व शाबान महीनें की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरु होती है और शाबान माह के 15वीं तारीख की रात तक मनायी जाती है। शब-ए-बारात दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। शब और रात, शब का अर्थ होता है रात और बारात का मतलब बरी होना, इस पर्व की रात को मुसलमानों द्वारा काफी महिमावान माना जाता है।
ऐसा माना जाता है इस दिन अल्लाह कई सारे लोगों को नरक से आजाद कर देते है। इस पर्व के इन्हीं महत्वों के कारण शब-ए-बारात के इस पर्व को पूरे विश्व भर के मुस्लिमों द्वारा इतने धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
वर्ष 2019 में शब-ए-बारात का पर्व 20 अप्रैल, शनिवार से शुरु होकर 21 अप्रैल, रविवार तक मनाया गया।
हर वर्ष के तरह इस वर्ष भी शब-ए-बारात का पवित्र त्योहार मनाया गया। इस विशेष दिन को लेकर कई दिन पहले से ही तैयारियां की जा रही थी। इस दिन के अवसर पर लोगों द्वारा जुलूस निकाला गया और कब्रिस्तानों में नमाज पढ़ी गयी। इसी पर्व के खुशी में बिहार के रोहतास में शब ए बारात के अवसर पर उर्स मेले में भाग लेने हजारों के तादाद में लोग इकठ्ठा हुए। इसके साथ ही लोगों द्वारा मस्जिदों पर विशेष नमाज अता की गयी और फतिहा भी पढ़ा गया।
इसी तरह राजस्थान के बुंदी में दावते इस्लामी हिंद की ओर से शनिवार की रात शब-ए-बारात के अवसर पर कब्रिस्तान के चौक मीरागेट पर जलसे का आयोजन किया गया था। इस दौरान मौलाना जावेद मिल दुलानी ने लोगों से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की अपील की गयी ताकि वह पढ़ लिखकर एक काबिल इंसान बन सके। इसके साथ ही उन्होंने नवयुवकों से इस इबादत के पर्व पर हुड़दंगई और स्टंटबाजी ना करने की भी अपील की।
इस वर्ष भी नही रुकी स्टंटबाजी
शब-ए-बारात के अवसर पर हर वर्ष प्रशासन द्वारा लोगों को तेज रफ्तार में गाड़ी ना चलाने और स्टंटबाजी ना करने की चेतावनी दी जाती है, लेकिन इस बार भी जुलूस में शामिल कई सारे युवा अपने हरकतों से बाज नही आये और जमकर हुड़दंगई और स्टंटबाजी की, इस दौरान पुलिस ने भी 14 लोगों के खिलाफ कारवाई की और 11 बाइकों को जब्त कर लिया। इसी तरह राजधानी दिल्ली में भी शब-ए-बारात के दिन स्टंटबाजी करके यातायात नियमों को तोड़ने के कारण सैकड़ों लोगों का चालान काटा गया।
इस्लाम में शब-ए-बारात के पर्व को काफी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मुस्लिम कैलैंडर के अनुसार शाबान माह की 14वीं तारीख के सूर्यास्त के बाद विश्व भर के विभिन्न देशों में इस त्योहार को काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। मुस्लिम धर्म में इस रात को बहुत ही महिमावान और महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन लोग मस्जिदों के साथ कब्रिस्तानों में भी इबादत के लिये जाते है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन पिछले साल के किए गये कर्मों का लेखा-जोखा तैयार होने के साथ ही आने वाले साल की तकदीर भी तय होती है। यहीं कारण है कि इस दिन को इस्लामिक समुदाय में इतना महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ है।
इस दिन लोग अपना समय अल्लाह की प्रर्थना में बिताते है। इसके साथ ही इस दिन मस्जिदों में नमाज अदा करने वाले लोगों की भारी भीड़ भी देखने को मिलती है। इस्लामिक मान्याताओं के अनुसार शब-ए-बारात का त्योहार इबादत और तिलावत का पर्व है।
इस दिन अल्लाह अपने बंदों के अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा जोखा करता है और इसके साथ ही कई सारे लोगों को नरक से आजाद भी कर देता है। यहीं कारण है कि इस दिन को मुस्लिम समुदाय के लोगो द्वारा इतना धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
हर पर्व के तरह शब-ए-बारात के पर्व को मनाने का भी अपना एक विशेष तरीका है। इस दिन मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास सजावट की जाती है। इसके साथ ही घरों में भी दिये जलाये जाते है और लोग अपने समय को प्रर्थना करते हुए बिताते हैं क्योंकि इस दिन नमाज पढ़ने, इबादत करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन रात में खुदा की इबादत करने और अपने गुनाहों की माफी मांगने का काफी अच्छा फल प्राप्त होता है क्योंकि इस दिन को पाप-पुण्य के हिसाब का दिन माना गया है।
इसलिए इस दिन लोग अल्लाह से अपने पिछले साल में हुए गुनाहों और भूल-चूक के लिए माफी मांगते हुए, आने वाले साल के लिए बरक्कत मांगते है। इसके साथ ही इस दिन कब्रिस्तानों में भी खास सजावट की जाती है और दिये जलाये जाते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जाता है इस दिन अल्लाह द्वारा कई सारी रुहों को जहुन्नम से आजाद किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि बरकत वाली इस विशेष रात में अल्लाह द्वारा सालभर तक होने वाले काम का फैसला लिया जाता है और फरिश्तों को कई सारे काम सौपे जाते है।
इसके साथ इस दिन लोगो द्वारा हलवां खाने की भी एक विशेष परंपरा है, ऐसा माना जाता है कि इसी तारीख को उहुद की लड़ाई में मुहम्मद साहब का एक दांत टूट गया था। जिसके कारण इस दिन उन्होंने हलवा खाया था, यहीं कारण है कि इस दिन लोगों द्वारा हलवा अवश्य खाया जाता है क्योंकि इस दिन हलवा खाना सुन्नत माना गया है।
हर पर्व के तरह आज के समय में शब-ए-बारात के पर्व में भी कई सारे परिवर्तन हुए है। वैसे तो इनमें कई सारे परिवर्तन काफी अच्छे और इस पर्व की लोकप्रियता को बढ़ाने वाले है लेकिन इसी के साथ इस पर्व में कुछ ऐसी कुरीतियां भी जुड़ गयी है, जो इस इतने महत्वपूर्ण पर्व के सांख पर बट्टा लगाने का कार्य करती है। पहले के अपेक्षा में आज के समय में इस पर्व की भव्यता काफी बढ़ गयी है। इस दिन मस्जिदों और कब्रिस्तानों में विशेष साज-सजावट देखने को मिलती है और लोग कब्रिस्तानों में अपने बुजर्गों और परिवारजनों के कब्रों पर जाकर चिराग जलाते है। -
यहीं कारण है कि इस दिन कब्रिस्तान भी रोशनी से जगमगा उठते हैं और यहां लोगो का एक मेला से देखने को मिलता है। हालांकि इसके साथ ही शब-ए-बारात के इस पर्व में कई सारी कुरुतियां भी जुड़ गयी हैं, जो इस पर्व के साख पर बट्टा लगाने का कार्य कर रही है। वैसे तो इस दिन को खुदा के इबादत और अपने बड़े बुजर्गों को याद करने के दिन के रुप में जाना गया है लेकिन आजकल के समय में इस दिन पर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों तथा सार्वजनिक जगहों पर युवाओं द्वारा जमकर आतिशबाजी तथा खतरनाक बाइक स्टंट किया जाते हैं। जोकि ना सिर्फ इस पर्व की छवि खराब करता है बल्कि की सामान्य लोगों के लिए भी खतरें का एक कारण बन जाता है। -
इन चीजों को लेकर कई बार मौलानाओं और इस्लामिक विद्वानों द्वारा लोगों को समझाया भी जा चुका है लेकिन लोगो द्वारा इन बातों पर ध्यान नही दिया जाता है। हमें इस बात को समझना होगा कि शब-ए-बारात का पर्व खुदा की इबादत का दिन है नाकि आतिशबाजी और खतरनाक स्टंट का, इसके साथ ही हमें इस बात का अधिक से अधिक प्रयास करना चाहिए कि हम शब-ए-बारात के इस पर्व के पांरपरिक रुप को बनाये रखे ताकि यह पर्व अन्य धर्म के लोगों में भी लोकप्रिय हो सके।
इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात के पर्व को काफी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि शाबान महीने के 14वीं तारीख के सूर्यास्त के बाद मनाये जाने वाले इस त्योहार पर अल्लाह बहुत सारे लोगों को नरक से आजाद कर देता है। इस रात मुस्लिम धर्म के लोग अपने मर चुके परिजनों के मोक्ष की प्रार्थना के लिए कब्रिस्तान जाते है और उनकी मुक्ति के लिए अल्लाह से फरियाद करते हैं।
इसके साथ ही इस दिन लोग अपने अल्लाह से अपने गुनाहों के लिए क्षमा भी मांगते है और इस दिन को अल्लाह की इबादत तथा कब्रिस्तान में जियारत और अपने हैसियत के अनुसार दान करते हुए बिताते हैं। यही कारण है कि इस्लाम धर्म में इस दिन को इतना महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
शब-ए-बारात के पर्व को लेकर कई सारी मान्यताएं और कथाएं प्रचलित है। इस्लाम में इस पर्व को काफी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, खुद कुरान और हदीस में इस पर्व के महानता का वर्णन किया गया हालांकि शिया और सुन्नी दोनो ही संप्रदाय के लोगों के इस पर्व को मनाये जाने के अलग-अलग मत हैं। सुन्नी संप्रदाय के लोगों का मनाना है कि इस दिन अल्लाह लोगों के वर्ष भर के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा करता है। वहीं शिया संप्रदाय के लोग इस दिन को शिया संप्रदाय के आखरी इमाम मुहम्मद अल महादी के जन्मदिन के रुप में मनाते है।
सुन्नी संप्रदाय की शब-ए-बारात से जुड़ी मान्यता
इस्लाम धर्म के सुन्नी संप्रदाय द्वारा माना जाता है कि जंगे उहुद में अल्लाह के पैंगबर मुहम्मद साहब का दांत टूट गया था। जिससे उस दिन उन्होंने हलवा खाया था, इसलिए इस दिन हलवा खाने को सुन्नत और काफी मंगलकारी माना गया। यहीं कारण है कि लोग इस दिन हलवा अवश्य खाते है। ऐसा कहा जाता है इस दिन अल्लाह आने वाले वर्ष की तकदीर लिखता है और पिछले साल के पाप-पुण्य का लेखा जोखा करता है।
शिया संप्रदाय की शब-ए-बारात से जुड़ी मान्यता
इस्लाम धर्म के शिया संप्रदाय की मान्यताओं के अनुसार इस दिन आखरी शिया इमाम मुहम्मद अल महीदी का जन्म हुआ था। इस दिन को शिया संप्रदाय के लोगों द्वारा जश्न के रुप में मनाया जाता है और घरों को सजाया जाता है मस्जिदों में दीप जलाये जाते है तथा नमाज, रोजा और प्रर्थना जैसी धार्मिक गतिविधियों का पालन किया जाता है। इस दिन शिया संप्रदाय के आखरी इमाम मोहम्मद अल महीदी का जन्मदिन होने के कारण इसे काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
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