25 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हाज़ा अल मंसूरी (Haaza Al-Mansoori) कज़ाखस्तान के बैकोनूर (Baikonur) के कोस्मोड्रोम से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में जाने वाले अरब देशों के पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए।:
वे ISS में 7 दिन की यात्रा पर गए हैं तथा उनके साथ एक महिला अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जेसिका अलरिका मीर (Jessica Ulrika Meir) तथा रूसी अंतरिक्ष यात्री ओलेग स्क्रिपोचका (Oleg Skripochka) भी गए हैं।:
अल-मंसूरी 3 अक्तूबर को नासा के निक हेग (Nick Hague) और रूसी अंतरिक्ष यात्री एलेक्सी ओविचिन (Aleksey Ovchinin) के साथ पृथ्वी पर लौट आएँगे।:
स्क्रिपोचका और मीर वर्ष 2020 के वसंत तक ISS पर रहने के लिये गए हैं।
⏩ क्या है ISS?
तमाम तनावों और मतभेदों के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) रूस और पश्चिम जगत के बीच सहयोग का एक दुर्लभ उदाहरण है, जो वर्ष 1998 के बाद से लगभग 28,000 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। ISS मे परिचालन और स्थायी रूप से निवास किया जा सकता है।:
यह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित है। ISS कार्यक्रम पाँच प्रतिभागी अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच एक संयुक्त परियोजना है, जिसमें NASA, रोस्कोस्मोस, JXA, ESA, और CSA शामिल हैं। अंतरिक्ष स्टेशन का स्वामित्व और उपयोग अंतर-सरकारी संधियों तथा समझौतों द्वारा तय किया गया है।:
2 नवंबर, 2000 से लगातार अंतरिक्ष यात्री ISS में कार्य कर रहे हैं। इसमें कई सोलर पैनल लगे हुए हैं और इसका वज़न लगभग 391000 किलोग्राम है। इसमें एक बार में छह अंतरिक्ष यात्री छह महीने तक रह सकते हैं।








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