11 जुलाई 2017: विश्व जनसंख्या दिवस
विश्व भर में 11 जुलाई 2019 को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया. विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर देश-विदेश में विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किये गये. इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को बढ़ती जनसंख्या से संबंधित विभिन्न विषयों से परिचित कराना है.
विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करके लोगों को परिवार नियोजन, मातृ स्वास्थ्य, लिंग समानता, गरीबी और मानव अधिकारों के प्रति जागरुक किया जाता है. इस दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है जिनमें जनसंख्या वृद्धि की वजह से होने वाले खतरे के प्रति लोगों को आगाह किया जाता है.
जनसंख्या वृद्धि एक गंभीर मुद्दा
जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं. विश्व भर के कई देशों के सामने जनसंख्या विस्फोट बड़ी समस्या का रूप ले चुकी है. मुख्य तौर पर विकासशील देशों में यह गहरी चिंता का विषय बनता जा रहा है. इसको नियंत्रित करने हेतु लंबे समय से कोशिशें की जा रही हैं.
मुख्य बिंदु:
• चीन और भारत विश्व के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश हैं. इन दोनों देशों में पूरी विश्व की आबादी के तीस प्रतिशत से भी ज्यादा लोग रहते हैं. आज के समय में नाइजीरिया सबसे तेज गति से जनसंख्या वृद्धि करने वाला देश है.
• नाइजीरिया जनसंख्या के मामले में भले ही अभी 7वें नंबर पर है, लेकिन यह साल 2050 से पहले अमेरिका को पीछे छोड़ कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है. विश्व की एक बड़ी आबादी आज भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत मूल सुविधाओं से दूर है. इसका मुख्य कारण लगातार बढ़ती आबादी है.
• भारत में परिवार नियोजन की महत्व को समझते हुए अब सीमित परिवार पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसी तरह से आबादी बढ़ती गई तो आने वाले समय में न केवल आवास और रोजगार की कमी होने वाली है बल्कि लोगों को खाने के लिए अनाज और पीने हेतु पानी की कमी होने वाली है.
• एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में 400 करोड़ लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है जिसमें 25 प्रतिशत भारतीय भी शामिल हैं.
विश्व जनसंख्या दिवस भारत के लिए महत्वपूर्ण क्यों?
विश्व जनसंख्या दिवस भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व की करीब साढ़े सात अरब आबादी में से करीब 130 करोड़ लोग भारत में रहते हैं. भारत की जनसंख्या वृद्धि की सही तरीके से बढ़ोतरी के लिए यह दिवस भारत के लिए महत्वपूर्ण है.
पृष्ठभूमि
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद (यूएनडीपी) द्वारा साल 1989 से इसकी शुरुआत की गयी. इस दिवस को उस समय शुरू किया गया जब विश्व की जनसंख्या पांच अरब के आसपास हो गई थी. इस दिवस के तहत समय-समय पर प्रजनन संबंधी स्वास्थ देख-रेख की माँग, बच्चों के स्वास्थ्य तथा गरीबी को घटाने के विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिसंबर 1990 में प्रस्ताव 45/216 पारित करके प्रत्येक साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाये जाने का निर्णय लिया गया.







