POCSO अधिनियम, 2012 को बच्चों के हित और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए बच्चों को यौन अपराध, यौन उत्पीड़न तथा पोर्नोग्राफी से संरक्षण प्रदान करने के लिये लागू किया गया था।
इस अधिनियम में ‘बालक’ को 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है और बच्चे का शारीरिक, भावनात्मक, बौद्धिक एवं सामाजिक विकास सुनिश्चित करने के लिये हर चरण को ज़्यादा महत्त्व देते हुए बच्चे के श्रेष्ठ हितों तथा कल्याण का सम्मान करता है।
इस अधिनियम की एक विशेषता यह है कि इसमें लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination) नहीं किया गया है।
इसे विस्तारित निहारिका परिकल्पना (Expanding Universe Hypothesis) भी कहते हैं।
इस सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है। एडविन हब्बल (Edwin Habble) ने वर्ष 1920 में ब्रह्मांड के विस्तार संबंधी प्रमाण प्रस्तुत किये थे।
GAIA अंतरिक्ष वेधशाला द्वारा की गई आकाशगंगाओं के विलय की खोज, इस सिद्धांत के पक्ष में एक प्रमाण है।
1. डायनेमो उपकरण द्वारा यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित किया जाता है।.
2. मोमबत्ती रासायनिक ऊर्जा को प्रकाश एवं ऊष्मा ऊर्जा में रूपांतरित करती है।
3. प्रकाश वर्ष दूरी मापने की इकाई है। दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई पारसेक है।
4. साधारण नमक ( सोडियम क्लोराइड NaCl ) खाने एवं आचार के परिरक्षण में उपयोग होता है।
5. हीरा एवं ग्रेफाइट कार्बन के अपरूप है।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 1990 में NIMH की स्थापना की गई थी।
इसे कर्नाटक सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1960 के अंतर्गत सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया था।
NIMH का पंजीकृत कार्यालय कोलार गोल्ड फील्ड, कर्नाटक और केंद्रीय प्रयोगशाला नागपुर में स्थित है।
संस्थान व्यावसायिक स्वास्थ्य और स्वच्छता में प्रायोगिक अनुसंधान करता है।
इसके अतिरिक्त यह अनुसंधान और विकास के माध्यम से खदानों की सुरक्षा एवं खनिकों के स्वास्थ्य की दिशा में भी प्रयास करता है।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 1990 में NIMH की स्थापना की गई थी।
इसे कर्नाटक सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1960 के अंतर्गत सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया था।
NIMH का पंजीकृत कार्यालय कोलार गोल्ड फील्ड, कर्नाटक और केंद्रीय प्रयोगशाला नागपुर में स्थित है।
संस्थान व्यावसायिक स्वास्थ्य और स्वच्छता में प्रायोगिक अनुसंधान करता है।
इसके अतिरिक्त यह अनुसंधान और विकास के माध्यम से खदानों की सुरक्षा एवं खनिकों के स्वास्थ्य की दिशा में भी प्रयास करता है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद एक स्वतंत्र निकाय है जिसका गठन भारत सरकार को और विशेष रूप से प्रधानमंत्री को आर्थिक एवं संबंधित अन्य मुद्दों पर सलाह देना है। इस परिषद में उच्च ख्याति प्राप्त और श्रेष्ठ अर्थशास्त्री शामिल होते है।
इसमें एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य होते हैं।
इसके सदस्यों का कार्यकाल प्रधानमंत्री के कार्यकाल के बराबर होता है।
आमतौर पर प्रधानमंत्री द्वारा शपथ ग्रहण के बाद सलाहकार समिति के सदस्यों की नियुक्ति की जाती है।
प्रधानमंत्री द्वारा पद मुक्त होने के साथ ही सलाहकार समिति के सदस्य भी त्यागपत्र दे देते हैं।








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