तू क्यू हताश है!
तू चल तेरे वजूद की समय को भी तलाश है!
जो तूझसे लिपटी बेडीया समझ ना इनको वस्र तू,
निकाल दे वो वस्र तू और बना ले एक शस्र तू..
चरित्र अगर पवित्र है तो क्यू है ये दशा तेरी,
ये पापीयों को हक नही की ले परिक्षा तेरी..
जला के भस्म कर दे जो क्रुरता का जाल है,
तू आरती की लहू नही तू क्रोध की मशाल है..
चूनर उडा के ध्वज बना गगन भी कपकपाएगा,
अगर तेरी चुनर गिरी तो एक भूकंप आयेगा..
तू खूद की खोज में निकल
तू क्यू हताश है!
तू चल तेरे वजूद की समय को भी तलाश है!
तू चल तेरे वजूद की समय को भी तलाश है!








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