अनुच्छेद 262(2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में न्यायिक पुनरावलोकन और सुनवाई के अधिकार से वंचित किया गया है।
अनुच्छेद 262 संविधान के भाग 11 का हिस्सा है जो केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रकाश डालता है।
अनुच्छेद 262 के आलोक में अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 का आगमन हुआ।
इस अधिनियम के तहत संसद को अंतर्राज्यीय नदी जल विवादों के निपटारे हेतु अधिकरण बनाने की शक्ति प्रदान की गई, जिसका निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बराबर महत्त्व रखता है।
इस कानून में खामी यह थी कि अधिकरण के गठन और इसके फैसले देने में कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई थी।
सरकारिया आयोग (1983-88) की सिफरिशों के आधार पर 2002 में अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 में संशोधन कर अधिकरण के गठन में विलंब वाली समस्या को दूर कर दिया गया।
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✅ महासागर विकास विभाग
(Department of Ocean Development- DOD)
महासागर विकास विभाग की स्थापना जुलाई 1981 में प्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री के नियंत्रण में मंत्रिमंडल सचिवालय के भाग के रूप में की गई थी और मार्च 1982 में यह एक अलग विभाग के रूप में अस्तित्व में आया।
पूर्व में महासागर विकास विभाग देश में महासागर से जुडी विकासात्मक गतिविधियों के समन्वय और उन्हें बढ़ावा देने वाले नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता था।
फरवरी 2006 में सरकार ने विभाग को महासागर विकास मंत्रालय के रूप में अधिसूचित किया।
इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने महासागर विकास मंत्रालय का पुर्नगठन किया और 12, जुलाई, 2006 को राष्ट्रपति की अधिसूचना के माध्यम से एक नए मंत्रालय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) की स्थापना की गई।
इसके तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department), भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Tropical Meteorology) और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र National Centre for Medium Range Weather Forecasting) को प्रशासनिक नियंत्रण में लाया गया। सरकार ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा आयोग (Space Commission and Atomic Energy Commission) की तर्ज़ पर पृथ्वी आयोग (Earth Commission)की स्थापना को भी अनुमोदन प्रदान कर दिया है।







