Saturday, July 20, 2019

☞   कुछ अच्छी बातें


मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,
दौर खुदा की रहमतों का चलता रहा,

वक़्त भले ही मेरे विपरीत था,
मैं ना जरा सा भी भयभीत था,
मुझे यकीं था की एक दिन सूरज जरूर निकलेगा,
क्या हुआ जो वो हर रोज ढलता रहा,
मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,

जब भी हुआ है दीपक में तेल खत्म,
तो समझो हो गया खेल खत्म,
निचोड़ कर खून रगों का इसमें,
मैं एक दीपक की भाँति जलता रहा,
मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,

झिलमिल से ख्वाब थे इन निगाहों में,
करता रहा महनत माँ की दुआओं में,
सींचता रहा परिश्रम के पौधे को दिन रात,
और ये पौधा सफलता के पेड़ में बदलता रहा,
मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,

ये सब तुम्हारी सबकी दुआओं का असर है,
जो मिली आज इतनी सुहानी डगर है,
तह दिल से शुक्रिया मेरे चाहने वालों,
आज मेरी किस्मत का सिक्का उछलता रहा,
मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,
दौर खुदा की रहमतों का चलता रहा।

0 comments:

Post a Comment

यदि आपको हमारे वेबसाइट पर पढ़ रहे पोस्ट अच्छे और काम के लग रहे है तो कृपया Comment Box में लिखना न भूले यदि आपका कोई प्रश्न या सुझाव हो तो हमे comment करे या हमारे दिए हुए email पर ईमेल जरूर करे। studieshubs@gmail.com


टेक्नोलॉजी और इंटरनेट की दुनिया से आप सभी को अप टू डेट रखने के लिए हमने यह वेबसाइट लॉन्च किया है । हमारे इस वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य है कि हम अपने भारत वासियों को अपनी मातृभाषा हिंदी में टेक्नोलॉजी और इंटरनेट से जुड़ी जानकारी साझा कर सकें। और पढ़ें

Advertisement Adnow

Popular Posts of The month

Amazon Offers

 
अब पाये सभी सरकारी नौकरी और उनसे जुड़े हुए किसी भी सवालो के जवाब हमारी website पर सबसे पहले