Tuesday, July 9, 2019

☞   हिमा दास ने 200 मीटर में स्वर्ण पदक जीता

भारत की फर्राटा धावक हिमा दास ने पोलैंड के पोन्जान एथलेटिक्स ग्रांड प्री-2019 के 200 मीटर रेस में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. यह जानकारी हिमा ने अपनी आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर दी. हिमा ने एक सप्ताह के भीतर  दूसरा अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता है.

हिमा दास ने 200 मीटर की इस रेस में 23.65 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता. उनके अलावा भारत की ही वीके विस्माया ने 23.75 सेकेंड का समय निकालकर कांस्य पदक हासिल किया.

असम के मुख्यमंत्री ने दी बधाई

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हिमा दास की इस उपलब्धि पर बधाई दी है. मुख्यमंत्री सोनोवाल ने ट्विटर पर लिखा की पोन्जान एथलेटिक्स ग्रां प्री-2019 के 200 मीटर में स्वर्ण पदक पर असम की शानदार स्प्रिंट धाविका हिमा दास को बधाई.

हिमा दास पिछले कुछ महीनों से पीठ दर्द से परेशान थीं. उनकी इस साल ये पहली प्रतिस्पर्धी दौड़ थी. उनका इंडिविजुअल बेस्ट परफॉर्मेंस 23.10 सेकंड है, जो उन्होंने पिछले साल हासिल किया था.

पुरुषों की 200 मीटर दौड़ में मोहम्मद अनस ने 20.75 सेकंड का समय लेकर तीसरा स्थान प्राप्त किया. उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा. पुरुषों के ही 400 मीटर दौड़ में के.एस. जीवन ने कांस्य पदक जीता. शॉटपुट में तजिंदरपाल सिंह तूर ने कांस्य पदक जीतने में सफलता हासिल की.

हिमा दास

•   हिमा दास का जन्म 09 जनवरी 2000 को नगाँव, असम में हुआ था.

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•   वे एक भारतीय धावक है. वे आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी है.

•   हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता. हिमा दास ने अप्रैल 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में 51.32 सेकेंड में दौर पूरी करते हुए छठवाँ स्थान प्राप्त किया था.

•   उन्होंने हाल ही में गुवाहाटी में हुई अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था.

•   हिमा दास ने इसके अलावा 18वें एशियन गेम्स 2018 जकार्ता में दो दिन में दूसरी बार 400 मीटर में राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़कर रजत पदक जीता था.



विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ जयपुर, प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में जयपुर की चारदीवारी को शामिल किया गया है. यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने 06 जुलाई 2019 को अजरबैजान की राजधानी बाकू में चल रही बैठक में यह निर्णय लिया.

इस बैठक में विश्व विरासत सूची में जयपुर शहर का नाम शामिल करने पर विमर्श हुआ. इस निर्णय के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ट्विट कर खुशी जाहिर की है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया टि्वट

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टि्वट कर लिखा की जयपुर संस्कृति और वीरता से जुड़ा शहर है. सुंदर और ऊर्जावान, जयपुर का अतिथि सत्कार सबको लुभाता है. यह प्रसन्नता का विषय है कि इस शहर को यूनेस्को की विरासत स्थल सूची में शामिल किया गया है.

जयपुर देश का यह दूसरा शहर है जो विश्व धरोहर सुची में शामिल किया गया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब विश्व के 16 देशों के प्रतिनिधियों नें जयपुर को हैरिटेज सिटी की लिस्ट में शामिल करने के लिए समर्थन दिया हैं. यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने अजरबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित किए गए सम्मेलन में इसी घोषणा की.

यूनेस्को की गाइडलाइन के तहत एक राज्य से प्रत्येक साल सिर्फ एक स्थान को ही वर्ल्ड हेरिटेज बनाने के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है. हालांकि, जयपुर के आमेर किले और जंतर-मंतर को विश्व विरासत सूची में पहले ही जगह मिल चुकी हैं.

सरकार की ओर से अगस्त 2018 में पिंक सिटी (जयपुर) को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था. यूनेस्कों के प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव के बाद जयपुर सिटी का दौरा किया था. राजस्थान सरकार ने हाल ही में चारदिवारी क्षेत्र को नो-कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया था.

यह भी पढ़ें: यूनेस्को ने कुंभ मेले को भारत की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा

जयपुर को हेरिटेज सिटी का दर्जा मिलने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. इससे लोकल अर्थव्यवस्था को में सुधार होगा और लोगों को रोजगार भी मिलेगा. इससे हस्तशिल्प और हस्तकरघा उद्योग को भी फायदा होना स्वभाविक है.

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यूनेस्को की संस्था इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (ICOMOS) की सिफारिश पर ही किसी भी शहर या क्षेत्र को अनूठी विरासत के कारण विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया जाता है.

जयपुर शहर

जयपुर शहर की स्थापना साल 1727 में राजा जयसिंह ने की थी. जयपुर जिसे गुलाबी नगर के नाम से भी जाना जाता है. यह अपनी स्थापत्य कला के कारण पर्यटकों में आकर्षण का केंद्र है. यहां की संस्कृति, वस्त्र सज्जा और लोकगीत लोगों को लुभाते रहे हैं. सांस्कृतिक रूप से संपन्न राज्य राजस्थान की राजधानी है. जयपुर को आधुनिक शहरी योजनाकारों द्वारा सबसे नियोजित और व्यवस्थित शहरों में से गिना जाता है. देश के सबसे प्रतिभाशाली वास्तुकारों में इस शहर के वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य का नाम सम्मान से लिया जाता है.

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