*ना मेरा 'एक' होगा,...!*
*ना 'तेरा' लाख होगा...!!*
*ना तारीफ 'तेरी' होगी,..!*
*ना मजाक 'मेरा' होगा...!!*
*गुरुर ना कर शाहे शरीर का, 'मेरा' भी खाक होगा...!*
*'तेरा' भी खाक होगा...!!*
*जिंदगी भर ब्रांडेड ब्रांडेड करने वालों याद रखना, कफन का कोई ब्रांड नहीं होगा...!!*
*कोई रोकर दिल बहलाता है,...!*
*तो कोई हसकर दर्द छुपाता है...!!*
*क्या करामात है कुदरत का...!*
*'जिंदा' इंसान पानी में डूब जाता है,और 'मुर्दा' तैरकर दिखाता है...!!*
*मौत को देखा तो नहीं,...!*
*पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी...!!*
*कमबख्त जो भी उससे मिलता है,...!*
*जीना छोड़ देता है...!!*
*गजब की एकता देखी है,...! लोगों कि इस जमाने में जिन्दों को गिराने में,...!*
*और मुर्दों को उठाने में...!!*
*जिंदगी में ना जाने कौन सी बात आखिरी होगी,...!*
*ना जाने कौन सी रात आखिरी होगी...!!*
*मिलते जुलते बातें करते रहो यारों,...!*
*एक दूसरे से ना जाने कौन सी मुलाकात आखिरी होगी...!!*
*शुभ संध्या* 🌧🤗
आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो
साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो
जब शाख़ कोई हाथ लगाते ही चमन में
शरमाए लचक जाए तो लगता है कि तुम हो
संदल से महकती हुई पुर-कैफ़ हवा का
झोंका कोई टकराए तो लगता है कि तुम हो
ओढ़े हुए तारों की चमकती हुई चादर
नदिया कोई बल खाए तो लगता है कि तुम हो
जब रात गए कोई किरन मेरे बराबर
चुप-चाप सी सो जाए तो लगता है कि तुम हो
शायर : जाँ निसार अख़्तर
गायक : भूपिंदर सिंह
"न मैं गिरा
और न मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे..!
पर.. लोग मुझे गिराने मे कई बार गिरे...!!"
सवाल जहर का नहीं था
वो तो मैं पी गया,
तकलीफ लोगों को तब हुई,
जब मैं जी गया.
डाली पर बैठे हुए परिंदे को पता है कि डाली कमज़ोर है ..
फिर भी वो उस डाली पर बैठता है क़्योकी उसको डाली से ज़यादा अपने पंख पर भरोसा है. ".........
"मुस्कुराना" सीखना पड़ता है ...!
"रोना" तो पैदा होते ही आ जाता हैं