कुल 10 हज़ार करोड़ रुपए लागत वाली यह योजना 1 अप्रैल, 2019 से तीन वर्षों के लिये शुरू की गई है।
यह योजना मौजूदा ‘फेम इंडिया वन’ का विस्तारित संस्करण है, जो 1 अप्रैल, 2015 को लागू की गई थी।
✔️प्रमुख उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में तेज़ी से इलेक्ट्रिक और हाईब्रिड वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
इसके लिये लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद में शुरुआती स्तर पर सब्सिडी देने तथा ऐसे वाहनों की चार्जिंग के लिये पर्याप्त आधारभूत संरचना विकसित करना आवश्यक है।
यह योजना पर्यावरण प्रदूषण और ईंधन सुरक्षा जैसी समस्याओं का समाधान करेगी।
✔️फेम इंडिया की प्रमुख विशेषताएँ
बिजली से चलने वाली सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर ज़ोर।
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन पर होने वाले खर्च के लिये मांग आधारित प्रोत्साहन राशि मॉडल अपनाना, ऐसे खर्च के लिये धन राज्य और शहरी परिवहन निगमों द्वारा दिया जाना।
सार्वजनिक परिवहन सेवाओं और वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिये पंजीकृत 3 वॉट और 4 वॉट श्रेणी वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये प्रोत्साहन राशि।
2 वॉट श्रेणी वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के सम्बन्ध में मुख्य ध्यान निजी वाहनों पर केंद्रित करना।
इस योजना के तहत 2 वॉट वाले 10 लाख, 3 वॉट वाले 5 लाख, 4 वॉट वाले 55 हज़ार वाहनों और 7000 बसों हेतु वित्तीय प्रोत्साहन राशि देने की योजना है।
नवीन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिये प्रोत्साहन राशि का लाभ केवल उन्हीं वाहनों को दिया जाएगा, जिनमें अत्याधुनिक लिथियम आयन या ऐसी ही अन्य नई तकनीक वाली बैटरियाँ लगाई गई हों।
योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिये पर्याप्त आधारभूत ढाँचा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसके तहत महानगरों, 10 लाख से ज़्यादा की आबादी वाले शहरों, स्मार्ट शहरों, छोटे शहरों और पर्वतीय राज्यों के शहरों में तीन किलोमीटर के अंतराल में 2700 चार्जिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है।
बड़े शहरों को जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्गों पर भी चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना है। ऐसे राजमार्गों पर 25 किलोमीटर के अंतराल पर दोनों तरफ चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना है।







