Wednesday, June 20, 2018

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 जोशना_चिनप्पा_ने_जीता_राष्ट्रीय_स्क्वाश_प्रतियोगिता_में_महिला_एकल_वर्ग_का_खिताब


 जोशना चिनप्पा ने राष्ट्रीय स्क्वाश प्रतियोगिता में महिला एकल वर्ग का खिताब जीता। फाइनल में उन्होंने सुनैना कुरुविल्ला को 11-5, 11-4, 7-11, 11-5 से हराया। यह जोशना चिनप्पा का 17वां राष्ट्रीय खिताब था, इसके साथ ही उन्होंने भुवनेश्वरी कुमारी के 16 खिताबों के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है।


जोशना चिनप्पा

जोशना का जन्म 15 सितम्बर, 1986 को चेन्नई में हुआ था।
जोशना चिनप्पा ब्रिटिश स्क्वाश चैंपियनशिप को जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं, यह ख़िताब उन्होंने 2003 में अंडर-19 श्रेणी में जीता था।
वे भारत की सबसे युवा राष्ट्रीय स्क्वाश चैंपियन हैं।
जोशना चिनप्पा और दीपिका पल्लिकल ने 2014 में राष्ट्रमंडल खेलों में महिला युगल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था, यह राष्ट्रमंडल खेलों में स्क्वाश में भारत का पहला पदक था।
जोशना चिनप्पा ने 2018 जकार्ता पालेमबांग में आयोजित एशियाई खेलों के एकल वर्ग में कांस्य पदक जीता था, जबकि टीम इवेंट में उन्होंने रजत पदक जीता।

✅ अल्ज़ाइमर क्या है?

अल्ज़ाइमर रोग एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (Neurological Disorder) है जो मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट करता है। इसके कारण रोगी की शारीरिक और मानसिक स्थिति क्षीर्ण हो जाती है उसे कुछ भी याद नहीं रहता है, उसकी निर्णय लेने की क्षमता घट जाती है, स्वभाव में लगातार परिवर्तन होता रहता है, आदि। प्रारंभ में ये लक्षण कम मात्रा में होते हैं लेकिन समय रहते इसका उपचार न कराया जाए तो यह गंभीर और असाध्य हो जाता है।

55-60 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में अल्ज़ाइमर, डिमेंशिया (dementia) का प्रमुख कारण है। डिमेंशिया रोग मानसिक रोगों का एक समूह होता है जिसमें व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता घट जाती हैं।

यह रोग मस्तिष्क में एक विशेष प्रकार की टैंगल्स (Tangles) नामक प्रोटीन निर्माण के कारण होता है। जिसे टाइप-3 डायबिटीज़ के नाम से भी जानते हैं।

उम्र बढ़ने के साथ साथ इसका खतरा और बढ़ जाता है लेकिन कभी कभी लेकिन कभी-कभी में दुर्लभ आनुवंशिक परिवर्तनों के कारण इसके लक्षण 30 वर्ष की आयु के लोगो में भी देखने को मिल जाते है।

अल्ज़ाइमर एक असाध्य रोग है क्योंकि इसमें मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएँ मृत हो जाती है, जो पुनः जीवित नहीं हो सकती हैं।

यू.एस. डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अल्ज़ाइमर होने का खतरा दोगुना होता है।

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